लखनऊ। सन 1987 के बाद से दो नारे ऐसे थे जो मुलायम सिंह यादव की हर सभा में गूंजा करते थे। इनमें पहला नारा था, ‘जिसका जलवा कायम है उसका नाम मुलायम है’ और दूसरा —धरतीपुत्र मुलायम सिंह जिंदाबाद’का। मुलायम सिंह यादव पहली बार धरतीपुत्र मुलायम कब कहे गए?’जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’ वाला नारा कहां से शुरू हुआ? दोनों नारे मुलायम की रैली और चुनावी सभा की शान हुआ करते थे। उनके मंच पर चढ़ते ही दोनों नारे खूब खूब गूंजते थे। इन दोनों नारों के पीछे की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। मुलायम सिंह को धरतीपुत्र की उपाधि कानपुर से मिली तो दूसरा नारा गोंडा से चला और फिर ये पूरे देश में गूंजता रहा।
वर्ष 1987 में मुलायम सिंह यादव क्रांति रथ लेकर प्रदेश की यात्रा पर निकले थे। उस दौरान मुलायम सिंह जनता दल में थे। लखनऊ से जब उनके क्रांति रथ ने कानपुर में प्रवेश किया तो बड़ी संख्या में समर्थकों ने गंगापुल पर मुलायम सिंह यादव का स्वागत किया। इनमें पूर्व विधायक श्याम मिश्रा शामिल थे। पूर्व विधान परिषद सभापति सुखराम सिंह व श्याम मिश्रा के भाई नरेश मिश्रा की माने तो श्याम मिश्र ने पहली बार धरतीपुत्र मुलायम सिंह जिंदाबाद का नारा लगाया। उसके बाद मुलायम सिंह के स्वागत के दौरान लगा यह नारा बाद में पूरी क्रांति रथ यात्रा के दौरान गूंजता रहा।
समाजवादी पार्टी बनाने के बाद मुलायम सिंह ने पूरे प्रदेश में पार्टी की पहचान बनाने के लिए रैलियां शुरू की थीं। वर्ष 1991 में मुलायम सिंह ने गोंडा में एक रैली प्लान की थी। इस रैली की पूरी जिम्मेदारी सुखराम सिंह यादव को सौंपी गई थी। सुखऱाम सिंह बताते हैं कि मुलायम सिंह की इस रैली को सफल बनाने के लिए वो एक महीने गोंडा में रहे थे। गोंंडा में मुलायम सिंह की रैली की जिम्मेदारी पंडित सिंह संभाल रहे थे।
रैली वाले दिन मंच पर एक नारा लिखा था। इस धरती से उस अंबर तक जिसका जलवा कायम है,जिसने कभी न झुकना सीखा,उसका नाम मुलायम है। पूछने पर पता चला कि पंडित सिंह ने यह नारा बनाया है। बाद में यह नारा छोटा होकर बन गया। जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है। उसके बाद से तो यह नारा गली—गली चुनाव के दौरान गूंजता रहता था। दोनों ही नारे मुलायम सिंह यादव की सभी सभाओं में गूंजा करते थे।

