अमित बिश्नोई
तस्वीरों का हमेशा बड़ा महत्त्व रहा है विशेषकर राजनीति में. जो बातें अपनी बयानबाज़ी में नहीं कही जा सकतीं उन्हें एक फोटो के ज़रिये बड़ी आसानी से कहा जा सकता है. सामने वाले को अपना सन्देश पहुँचाने में तस्वीरों का बड़ा इस्तेमाल होता है. शायद यही वजह है एक राजनेता कलमकारों से ज़्यादा प्रेस फोटोग्राफों को पसंद करता है. किसी से नज़दीकी का पैग़ाम देना हो तो बस कंधे पर हाथ रखना काफी है और किसी से तल्खी का एहसास कराना हो तो नज़रअंदाज़ी का भाव बस चेहरे पर लाना होता है, बाकी का काम फोटोग्राफर के ज़रिये कलमकार कर देते हैं.
आज ऐसी ही एक तस्वीर यूपी विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सदन से सामने आयी. पहली नज़र में तो यह तस्वीर सपा विधायकों के ग्रुप की लगती है जो सदन में सरकार के खिलाफ हंगामा कर रहे हैं मगर तस्वीर में एक ख़ास बात यह दिखी कि जसवंतनगर से समाजवादी पार्टी के टिकट से चुनाव लड़कर विधायक बने शिवपाल यादव बाक़ी दूसरे सपा विधायकों से अलग नज़र आये या फिर जानबूझकर अलग दिखने की कोशिश की.
तस्वीर में दिख रहा है बाक़ी सपा विधायक तो पार्टी की पहचान लाल टोपी को अपने सिर पर धारण किये हुए हैं, अखिलेश यादव भी लाल टोपी लगाए हुए हैं मगर शिवपाल यादव के सिर पर टोपी नहीं है. सवाल यही है क्यों? ज़ाहिर सी बात है कि पार्टी निर्देश के मुताबिक सभी सपा विधायकों ने लाल टोपी पहनी होगी तो क्या शिवपाल यादव ने टोपी न पहनकर यह बताने की कोशिश की है वह सपा से अलग हैं, क्या वह ये जताने की कोशिश कर रहे थे कि मैं सपा विधायक होकर भी सपा से अलग हूँ और पार्टी मुखिया के आदेशों का पालन नहीं करूंगा। अखिलेश और शिवपाल के बीच इसे आप एक और संकेत मान सकते हैं.

