स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय हॉकी टीम के स्ट्राइकर एसवी सुनील ने कहा कि पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने पिछले 10 सालों में काफी प्रगति की है. सुनील ने मौजूदा टीम की तुलना 2007 की टीम से करते हुए कहा कि राष्ट्रीय टीम का प्रबंधन को लेकर बहुत कुछ बदल गया है.
अब टीम में और अधिक पेशेवर रवैया और जवाबदेही है. गौरतलब है कि सुनील ने 2007 में एशिया कप से इंटरनेशनल हॉकी में डेब्यू किया था.
2007 में किया था डेब्यू
सुनील ने कहा, यह बहुत अलग था जब मैंने 2007 में भारत की सीनियर टीम में पदार्पण किया था. उन्होंने कहा, अब टीम में बहुत अधिक पेशेवर रवैया और जवाबदेही है. हॉकी इंडिया ने सुनिश्चित किया है कि हमारे पास गुणवत्ता सहायता प्रणाली है जो अन्य शीर्ष देशों की तुलना में बराबर या बेहतर है. प्रतिस्पर्धा की योजना यह सुनिश्चित करती है कि हम शीर्ष टूर्नामेंट्स में पहले से अच्छा प्रदर्शन करें. इस व्यवस्था ने टीम के सुधार में अहम योगदान दिया है. कोचिंग में दो-तरफा संचार प्रणाली ने टीम को विश्व हॉकी में रैंकिंग में उपर चढऩे में मदद की है.
चौथे नंबर की बनी टीम
सुनील ने कहा, सीनियर खिलाडिय़ों से भी हॉकी इंडिया द्वारा सलाह ली जाती है, ताकि हम सही रास्ते पर चल सकें. मुझे लगता है कि इन पहलुओं ने न केवल खिलाडिय़ों के साथ-साथ सपोर्ट स्टाफ को भी अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह बनाया है, बल्कि इससे भारत को भी वल्र्ड रैंकिंग में चौथे नंबर की टीम बनने में मदद की है.

