ज़िन्दों को पशेमाँ करने लगीं शमशानों में लाशों की रैलियां

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ज़िन्दों को पशेमाँ करने लगीं शमशानों में लाशों की रैलियां

  • नवेद शिकोह
ज़िन्दों को पशेमाँ करने लगीं शमशानों में लाशों की रैलियां

आम और ख़ास लोगों की लापरवाहियों का सिलसिला थम जाने की उम्मीद दामन फैलाकर कह रही है कि अब सुधर जाओ। जब जागो तभी सवेरा। मौत बन कर देश में फैल रहा कोरोना वायरस शायद अब तमाम एहतियातों को बरतने पर मजबूर कर दे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन पुनः शुरू हो जाए। श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में जनाजों की भीड़ का खौफ शायद बाजारों और उत्सवों की लापरवाह भीड़ पर विराम लगा दे। दिग्गज नेताओं की चुनावी रैलियों की भीड़ भी अब शायद नहीं दिखे। मौत का खौफ अब जिन्दगी जीने का सलीखा सिखाने लगा है। आम और ख़ास लोगों की कल की गलतियां आज का सबक बन गई हैं।

आम इंसान जिसको अपना हीरो मानता है उसके नक्शे कदम पर चलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में कोरोना की भयानक स्थिति को लेकर काफी संजीदा हो गये हैं इसलिए राज्य सरकारें, नौकरशाही और देश की जनता लापरवाहियां छोड़कर इस जानलेवा संक्रमण से जंग लड़ने के लिए गभीर हो जाएगी। हम इस महामारी का डर भुला बैठे थे। सब लोग लापरवाह और बेफिक्र हो गए थे। कोरोना की वापसी होने के बाद भी अपने नायक को चुनावी रैलियों में भीड़ जुटाते देख देश की आम जनता भी इस वायरस को हल्के में लेने लगी थी। हालात बदतर से बदतर होते देख प्रधानमंत्री ने दोबारा कोरोना से जंग छेड़ने का एलान कर दिया है। उम्मीद है कि अपने नायक/नेता को इस संजीदा मसले पर बेहद गंभीर देखकर सारा देश उनके मार्गदर्शन में जंग के सिपाही की तरह सीरियसली अपना-अपना योगदान देगा। क्योंकि ये लड़ाई आम जानता की भागीदारी के बिना नहीं जीती जा सकती है।

पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक सूरत में आतंकित करने वाले कोरोना संक्रमण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काफी संजीदा नज़र आए। उन्होंने देश के कई मुख्यमंत्रियों को टिप्स दिए। टेलीविजन के जरिए वो देश की जनता से भी मुखातिब थे। अभी चंद दिनों पहले ही पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मुसलसल बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियों को संबोधित करने के बाद पीएम ने आज कोरोना के खराब होते हालात का जिम्मेदार जनता की लापरवाही को भी माना। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से ताकीद की कि दवाई के साथ कड़ाई हो। बोले- ये वेब पहले से बहुत ज्यादा खतरनाक है। लोगों का डर खत्म होने से लापरवाहियां हुईं। उन्होंने कहा कि जांचों को बढ़ाना होगा। बिना लक्षण का कोरोना बढ़ा है। माइक्रो कंटेनमेंट जोन पर ध्यान दिया जाए, ऐसे ठिकानों पर खूब जांचे हों ताकि इस संक्रमण को रोका जा सके। प्रधानमंत्री ने टीका उत्सव मनाने की बात कही।

जिस तरह पिछले कोरोना काल में कई बार टेलीविजन के जरिए राष्ट्र से मुखातिब होकर प्रधानमंत्री ने आम जनता को इस लड़ाई का हिस्सा बनाया था वैसे ही पहले से भी काफी खतरनाक इस मुश्किल दौर में उन्होंने जनता का सहयोग मांगा। गौरतलब है कि पिछले वर्ष जनता कर्फ्यू से लेकर लम्बे दौर तक चले लॉकडाउन में जनता का बखूबी सहयोग मिला था। वजह ये भी थी जनता के लोकप्रिय प्रधानमंत्री ने बार बार जनता से जुड़कर उन्हें कोविड के खिलाफ जंग का सिपाही बनाया था। साथ ही पीएम ने कभी ताली-थाली बजवाने या दीए जलाने जैसी टास्क देकर मुश्किल भरे लॉकडाउन को एक उत्सव का रंग दिया था। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री ने कोविड से लड़ाई के लिए जनता का कदम ताल मिलवाया था। इस बार भी वो यही चाहते हैं।

पिछला सख्त वक्त गुजरा तो धीरे-धीरे सब संक्रमण के खतरों को भुला बैठे। प्रधानमंत्री और हर पार्टी के बड़े-बड़े राजनेताओं को चुनावी रैलियों की भीड़ को संबोधित करते देखा तो आम जनता भी समझने लगी कि अब खतरा टल गया है। ख़ास को देखकर आम इंसान भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भूल गया।

जिसका नतीजा सामने है। श्मशान और क़ब्रिस्तान में लाइन लगी है। राजधानी लखनऊ मे ही हर दिन संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यहां एक दिन में दो हजार मामले सामने आए, पूरे यूपी और सम्पूर्ण देश में संक्रमण की आंधी से जनता कांप गई है। सब अपनी लापरवाहियों पर शर्मिंदा हैं। मौत से लड़ने के लिए सारे हथियार निकाल लाए गए हैं। देश का नेतृत्व करने वाले पीएम मोदी ने राज्य सरकारों और आम जनता संग मुश्किल घड़ी से उबारने की शुरुआत की है।

मजबूत लीडरशिप किसी देश की ताकत होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता और उनके चाहने वालों की भारी तादाद से देश को मजबूत लीडर (प्रधानमंत्री) का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। चुनावी रैलियों की लापरवाह भीड़ इकट्ठा करने का सिलसिला एक बड़ी गलती थी। इस बात से पशेमान होकर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश एकजुट होकर कोरोना को एक बार फिर हराएगा। उम्मीद पर दुनिया क़ायम है। मजबूत लीडरशिप की ताकत के साथ हमारे हौसले, हिम्मत और जागरूकता आशा की किरण ज़रूरी दिखाएगी।

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