अमित बिश्नोई
उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हुआ, उम्मीद के मुताबिक राज्यपाल के अभिभाषण में सपा विधायकों का हंगामा भी हुआ. मगर मीडिया को और बाक़ी लोगों को जिसका घटना का इंतज़ार था वह नहीं हुई, यानि न तो उनका अपने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से आमना सामना हुआ और न ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से. आज़म खान आये, लॉबी से लिफ्ट में घुसे, विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में बेटे के साथ विधायक पद की शपथ भी ली, सदन कक्ष में जाकर अपनी कुर्सी पर भी हाथ फेरा और फिर लिफ्ट से वापस उतारकर विधानसभा परिसर से निकल गए।
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कल से आज़म और अखिलेश के पास पास बैठने की बातें चल रही थी, सीएम योगी से आमना सामना होने की बाते हो रही थीं, इन लम्हों को कैमरे में क़ैद करने के लिए पत्रकारों से लेकर विधायक भी बहुत उतावले थे, मगर आज़म खान ने सबके अरमानों पर पानी फेर दिया। आज़म खान ने इतना सब सदन की कार्रवाई जो सुबह 11 बजे होनी थी उससे पहले ही पूरी कर ली. बता दें कि आज़म खान का जब विधानसभा से एग्जिट हुआ तभी सदन में विपक्ष के नेता अखिलेश यादव की इंट्री हुई. अब आप इसे संयोग समझिये या कुछ और आज़म ने विधानसभा में अपनी एक घंटे की मौजूदगी के दौरान जो कुछ किया उससे मीडिया को मसाला तो बहुत मिल गया. राजनीति पर चर्चा करने वालों को आज का टॉपिक मिल गया।
नाराज़गी है या नहीं के बीच आज़म खान वापस रामपुर लौट गए, बताया जा रहा है कि उन्हें एक केस के सिलसिले में रामपुर जाना ज़रूरी था. आज़म खान लखनऊ तो कल रात ही आ गए थे, विधायक निवास में ठहरे थे और सुबह विधानसभा भी गए, सवाल यह उठता है कि इस बीच अखिलेश यादव को क्या पांच मिनट का भी समय नहीं मिला कि आज़म खान से मिलते। यह वही आज़म खान हैं जो अखिलेश के सीएम बनने में पार्टी के अंदर चल रहे विरोध पर चट्टान की तरह अखिलेश के साथ खड़े थे, जो हर अच्छे बुरे वक्त में पहले मुलायम और अब अखिलेश के साथ रहे और आज भी हैं मगर तल्खियां लिए हुए।
आज़म का लखनऊ आना, विधानसभा जाना, सदन में अपनी कुर्सी देखकर वापस चले जाना, क्या अखिलेश नहीं चाहते कि आज़म खान के साथ दिखकर तल्खियों, नाराज़गियों की बातों पर विराम लगे. सीतापुर जेल के गेट पर न सही मगर लखनऊ में विधायक निवास या विधानसभा परिसर में अखिलेश-आज़म की साथ में एक फोटो बहुत बड़ा पैग़ाम दे सकती थी, क्या अखिलेश नहीं चाहते कि ऐसा कोई पैग़ाम जाय. क्या यह एक संयोग था कि आज़म के जाते ही अखिलेश सदन में पहुंचे।
अगर यह एक संयोग था तो समाजवादी पार्टी के लिए अच्छा नहीं था. आज़म खान चाहे जितना कहें कि वह नाराज़गी की हैसियत ही नहीं रखते मगर दिल में अगर दर्द है तो वह छलक ही जाता है. बताते हैं कि आज़म खान आज जब शपथ लेने के लिए विधानसभा पहुंचे तो सपा के एक विधायक उनसे मिलने आगे बढ़े मगर आज़म खान ने उनके साथ जिस अंदाज़ में बात कि वह खुद हक्का बक्का हो गए, आज़म के इस रवैये से ज़ाहिर है कि आज़म के अंदर एक आग जल रही है जो कभी भी ज्वालामुखी बन सकती है, जिसका लावा कभी भी फट सकता है।
राजनीति के पंडितों के दिमाग़ में इस वक़्त सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर आज़म खान रामपुर जाने की जल्दी में थे तो फिर वह अपनी कुर्सी देखने सदन के अंदर क्यों गए, क्या वह यह कन्फर्म करने गए थे कि वाकई उनके बैठने का स्थान अखिलेश यादव के बग़ल में है या फिर दिमाग़ में कुछ और चल रहा है. इस मामले में सपा की तरफ से लगातार सफाई दी जा रही है कि आज़म खान और अखिलेश यादव के बीच किसी भी तरह की नाराज़गी नहीं है, यह सिर्फ मीडिया की और अखिलेश विरोधियों के दिमाग़ की उपज है उन्हें बदनाम करने की साज़िश है. मगर सामने जो दिख रहा है उससे कोई अँधा भी इंकार नहीं कर सकता। कहा जा रहा कि आज़म और अखिलेश के मुद्दे को थोड़ा समय दीजिये, जल्द ही सारा सच सामने आ जायेगा। हमें भी उसका इंतज़ार है।

