मेरठ। मेरठ आए केंद्रीय पशुपालन डेयरी राज्यमंत्री डा0 संजीव बालियान एक बार फिर से हरित मुददे को हवा दे गए। बाई पास स्थित सुभारती विवि के मांगल्या आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री डा0 संजीव बालियान ने पहले पश्चिमी यूपी के 17 हजार डेयरी किसानों के जरिए बनाई गई ‘हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी’ का उद्घाटन किया। उसके बाद उन्होंने अपने भाषण में हरित प्रदेश का जिक्र जरूर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज नहीं तो कल कभी न कभी हरित प्रदेश हमे मिलेगा जरूर। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने हरित प्रदेश पर बड़ा बयान देकर एक बार फिर से अलग राज्य की मांग को हवा दे दी है।
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बता दें कि हरित प्रदेश का मुददा आज से नहीं दशकों से पश्चिमी उप्र की जनता का ज्वलंत मुददा रहा है। अपने भाषण में केंद्रीय राज्यमंत्री डा0 संजीव बालियान ने कहा कि हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी का नाम बहुत अच्छा है। उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में यह नाम दूसरी वजह से भी चमकेगा और कभी न कभी तो हरित प्रदेश हमें मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये कोई कम्पनी नहीं है बल्कि इसके मालिक किसान हैं। आपको बता दें कि हरित प्रदेश का नाम 90 के दशक में कांग्रेस नेता निर्भय पाल शर्मा और इम्तियाज खान ने देकर आंदोलन की शुरूआत की थी।
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हरित प्रदेश में मेरठ, आगरा, मथुरा, सहारनपुर, मुरादाबाद तथा बरेली मंडल को शामिल कर एक अलग प्रदेश बनाने की मांग की गई थी। लेकिन 90 के दशक से चली आ रही ये मांग आज तक पूरी नहीं हो पा पाई। रालोद हरित प्रदेश के लिए सबसे अधिक मुखर राजनैतिक पार्टी रही। रालोद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और इसके संस्थापक दिवंगत चौधरी अजित सिंह हमेशा से हरित प्रदेश की वकालत करते रहे। उन्होंने इसके लिए कई आंदोलन भी चलाए। वहीं मायावती भी हरित प्रदेश की एक बार वकालत कर चुकी हैं। भाजपा सरकार शुरू से ही छोटे प्रदेशों की पक्षधर रही है। लेकिन जब से पार्टी सत्ता में आई हैं उसके बाद से भाजपा ने भी इस मुददे पर चुप्पी साध ली है। हालांकि गाहे बगाहे ये मामला उठता रहा है। लेकिन अब एक बार भाजपा सरकार के केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने इस मुददे को सार्वजनिक मंच से कहकर हवा दे दी है।

