लखनऊ : सपा और भाजपा के घोषणा पत्र में प्रमोशन में आरक्षण बिल नहीं होने से प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थक नाराज हो गए है। दलील है कि दोनों ही दलों ने दलित कर्मचारियों को धोखा देने का काम किया है। ऐसे में अब प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थक कर्मचारी और उनके परिवार के लोग इनको सबक सीखाने का काम करेंगे। दरअसल, मंगलवार को सपा और बीजेपी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया। दलित कर्मचारियों को उम्मीद थी कि इसमें प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे को भी रखा जाएगा और दल इसका समर्थन करेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। ऐसे में आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के लोग नाराज हो गए है।
Read Also : लखनऊ से ममता की नजर दिल्ली पर, मोदी के सामने खुद को प्रोजेक्ट करने में जुटीं दीदी
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश वर्मा ने कहा कि न ही दलित कार्मिकों के लिए पदोन्नति में आरक्षण की बात की गई और न पिछड़े वर्गों के लिए पदोन्नति में आरक्षण बहाली की बात की गई। उन्होंने कहा कि इससे अब एक बात साफ हो गई है कि सपा और भाजपा दोनों दलित व पिछड़े वर्गों के कार्मिकों के लिए पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था की बहाली पर चुप होकर केवल दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों का वोट चाहती है। लेकिन उनका अधिकार उन्हें नहीं देना चाहती है।
हटाना था तो घोषणा पत्र में शामिल किया
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इससे पूर्व जब साल 2012 विधान सभा चुनाव में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त करना था तो समाजवादी पार्टी की सरकार ने अपने घोषणापत्र में इस बात को शामिल किया था। लेकिन, अब जब पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को बहाल करने के लिए लंबे समय से आरक्षण समर्थक कार्मिक आंदोलन कर रहे हैं उसके बावजूद भी उस पर कोई बात ना किया जाना इस बात को सिद्ध करता है दाल में कुछ काला है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के कोर ग्रुप की एक बैठक होगी और उसके बाद संघर्ष समिति अपने अगले निर्णय पर अपनी कार्ययोजना के तहत काम करेगी।
Read Also- योगी के विधायक सुरेंद्र सिंह का ऐलान, बीजेपी का क्लीन स्वीप करा दूंगा
दो लाख कर्मचारियों को रिवर्ट किया गया था
प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त हुई तो प्रदेश में दो लाख दलित कर्मचारियों को रिवर्ट किया गया था। आज वह अपमानित महसूस कर रहे हैं। अब जब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को राज्य सरकारों पर लागू करने के लिए छोड़ दिया गया तब भी दोनों राजनीतिक दल प्रदेश के दलित कार्मिकों को उनका संवैधानिक हक नहीं देना चाहते हैं, जो अपने आप में बहुत बड़ा सवाल है। प्रदेश के हमारे सभी 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक पहले से ही जानते थे की सपा व भाजपा पदोन्नति में आरक्षण की पक्षधर नहीं है वास्तव में केंद्र की भाजपा सरकार पदोन्नति में आरक्षण की पक्षधर होती तो पिछले लगभग 8 वर्षों से पदोन्नति में आरक्षण का संवैधानिक बिल जो लोकसभा में लंबित है उसे पारित कराकर आज दलित कार्मिकों को उनका अधिकार दिला दिया गया होता लेकिन ऐसा ना करके भाजपा ने यह बता दिया है दलित कार्मिकों से उनका भी कोई लेना देना नहीं है।

