किसान आंदोलन से हुआ 27 हजार करोड़ का नुकसान

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किसान आंदोलन से हुआ 27 हजार करोड़ का नुकसान

  • कैट के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली व एनसीआर राज्यों को हुआ बड़ा नुकसान
  • लंबा रास्ता अपनाने पर परिवहन लागत के साथ माल की कीमतों में हो गयी वृद्धि

न्यूज डेस्क। कृषि कानून के विरोध में दिल्ली की सीमा पर डेरा डाल कर चलाये जा रहे किसान आंदोलन से दिल्ली व एनसीआर राज्यों को अभी तक 27 हजार करोड़ का नुकसान होने का आंकलन किया जा रहा है। गौरतलब है कि एक महीने से अधिक समय गुजर चुका है और दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनरत किसानों के कारण माल को लेकर आने-जाने वाले ट्रकों का रास्ता भी बंद है। ऐसे में या तो ट्रक दिल्ली में आ-जा नहीं पा रहे या फिर उन्हें लंबा रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में पंजाब और हरियाणा से दिल्ली आने वाले माल की अपूर्ति पर असर पड़ा है। परिवहन लागत महंगी होने से माल की कीमतों में भी वृद्धि हुई है।

व्यापारिक संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देशभर के विभिन्न राज्यों से सामान लेकर लगभग 50 हजार ट्रक हर रोज दिल्ली आते हैं। वहीं दिल्ली से माल लेकर अन्य राज्यों में जाने वाले ट्रकों की संख्या भी लगभग 30 हजार आंकी गयी है। लेकिन कृषि कानून के विरोध में आंदोलनरत किसानों ने एक माह से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दिया हुआ है।

किसान आंदोलन के चलते ट्रकों की आवाजाही पहले की तरह नहीं हो पा रही है। कैट के अनुसार दिल्ली से कई राज्यों को जोड़ने वाली सड़कों पर धरनारत किसानों के आंदोलन के चलते हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा सहित देश के अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाले और दिल्ली से अन्य राज्यों को जाने वाले माल की आपूर्ति पर बड़ा फर्क पड़ा है। एक महीने से चल रहे किसान आंदोलन के कारण दिल्ली व एनसीआर राज्यों को अभी तक 27 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। अभी दिल्ली के लिये माल की आपूर्ति का जारी रखने के लिये ट्रकों को वैकल्पिक मार्गों से लंबा सफर तय करने को मजबूर होना पड़ रहा है। लेकिन इससे माल की लागत में वृद्धि होने से महंगाई बढ़ रही है।

कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स तथा ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन की माने तो आंदोलन लंबा खिंचने से माल की आपूर्ति पर असर पड़ेगा और महंगाई बढेगी। वहीं परिवहन लागत अधिक होने या रास्ते बंद होने के कारण सप्लाई न हो पाने के कारण माल खराब होने का अंदेशा भी रहता है। दोनों संगठनों का कहना है कि किसान और सरकार को जल्द इस मामले का हल निकालना चाहिये ताकि और अधिक नुकसान होने से रोका जा सके।

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