देहरादून। उत्तराखंड देश ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन स्थलों में एक है। यहं पर प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में धार्मिक पर्यटक आते हैं। उत्तराखंड राज्य की जीडीपी में पर्यटन उद्योग का बहुत अधिक महत्व है। उत्तराखंड प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र की 15.45 प्रतिशत भागीदारी है। यहीं कारण है कि यहां पर रोजगार के रूप में भी धार्मिक पर्यटन (Religious tourism) का काफी महत्व है। पर्यटन क्षेत्र से प्रदेश के लाखों युवा और व्यापारी वर्ग जुड़ा हुआ है। यह बातें पर्यटन को बढ़ावा और उसमें निवेश की संभावनाओं के लिए आयोजित की गई वेबिनार में कही गई। वेबिनार अंतराष्ट्रीय निदेशक संस्थान द्वारा आयोजित की गई थी। जिसमें उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर्नल अश्विनी पुंडीर (Colonel Ashwini Pundir) ने भाग लिया। उन्होंने उत्तराखंड पर्यटन की ओर से राज्य का प्रतिनिधित्व किया। इस वेबिनार में पर्यटन उद्योग से जुड़े देश विदेश के व्यापारियों और निवेशकों ने भी हिस्सा लिया। बेबिनार में कर्नल अश्विनी पुंडीर ने बताया कि उत्तराखंड राज्य में सभी तरह के पर्यटन की संभावनाएं हैं। इन पर्यटनों में धार्मिक पर्यटन के साथ ही साहसिक और ग्रीष्म काल और शीतकाल पर्यटन भी शामिल है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 15.45 प्रतिशत हिस्सा जीडीपी में पर्यटन उद्योग का है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन जहां राज्य की अर्थव्यवस्था का स्रोत है वहीं यह रोजगार भी एक प्रमुख साधन है। उत्तराखंड में पिछले दस साल में पर्यटन उद्योग में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं पिछले पांच साल में यहां पर 15 प्रतिशत पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि तीन साल से कोरोना संक्रमण (corona infection) के चलते पर्यटन उद्योग पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा है। जिससे जल्द ही राज्य बाहर निकलेगा और एक बार फिर से पर्यटन उद्योग रफ्तार पकड़ेगा। वेबिनार में उन्होंने बताया कि पुराने पर्यटन स्थलों का समय—समय पर सौदर्यीकरण होता है जबकि दर्जनों नए पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं। जिन पर तेजी से काम चल रहा है।

