मेरठ/हापुड। हापुड जिले के धौलाना की अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में झुलसे मजदूरों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। देर रात चार और लोगों ने दम तोड़ दिया। मरने वालों की संख्या अब 12 तक पहुंच गई है। वहीं धमाकों में आग लगने से झुलने लोगों में चार की हालत गंभीर है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति काफी नाजुक है। अभी मरने वालों की संख्या और अधिक बढ़ सकती है। धौलाना में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाकों में मजदूरों की चीख-पुकार दब गई। चींख पुकार के बीच लोग जान बचाने के लिए दौड़ रहे थे। धमाकों से जहां फैक्ट्री की दीवारें जमींदोज हो गई। फैक्ट्री की टीन का तो पता ही नहीं चला। झुलसे लोगों को देखकर रूह कांप रही है। किसी का हाथ कटा था तो कोई दम तोड़ चुका था।
Also read: पटाखा फैक्टरी में भीषण धमाका, आठ कारीगरों की मौत
दहशत का मंजर ऐसा कि यह ताउम्र याद रहेगा। हापुड़ के रिहान ने बताया कि पांच दिन पहले काम पर लगा था। उसका दोस्त तालिब वहां पर था। लंच के बाद काम शुरू किया तो पहला धमका हुआ। इसके बाद लगातार कई धमाके होते रहे। एक मिनट में पूरी फैक्ट्री आग का गोला बन गई। तीन धमाकों ने पूरे इलाके का नक्शा बदल दिया। सनोज निवासी शाहजहांपुर भडेरी गांव से अपने कुछ लोगों के साथ काम पर पहुंचा था। खाना खाने के बाद जैसे काम शुरू हुआ चारों तरफ धमाका सुनाई दिया।
Also read: कानपूर की साम्प्रदायिक घटना ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी: मायावती
इसके बाद सबकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया था। कान भी सुन्न पड गए। भाई सनोज करीब 70 प्रतिशत जल गया है। उसका दर्द नहीं देखा जा रहा। लोगों को बताया है। लेकिन अभी तक कोई पहुंचा नहीं। झुलसे हुए लोगों ने बताया कि फैक्ट्री में काम करने वालों को दस हजार रूपये महीना दिया जाता है। पटाखा फैक्ट्री में काम करने के एवज में किसी को इससे अधिक भी मिलता था। लेकिन उसको ओवरटाइम करना होता था। काम करने वाले मजदूरों ने कभी सोचा नहीं होगा कि ऐसा भी हो सकता है। मरने वालों के घरों में कोहराम मचा हुआ है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी प्रकार के मुआवजे की कोई घोषणा नहीं हुई है।

