रेड जोन में यूथ, कोरोना बना घातक

मेरठ रीजनरेड जोन में यूथ, कोरोना बना घातक

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रेड जोन में यूथ, कोरोना बना घातक

नई उम्र के मरीजों को तेजी से जकड़ रहा वायरस का संक्रमण
21 से 40 साल तक के 213 मरीज़ आएं गिरफ्त में, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

अमित बिश्‍नोई

मेरठ. कोरोना वायरस जे जिले में एक बार फिर आतंक फैलाना शुरू कर दिया है। बढ़ते आंकड़े दिनों दिन डरा रहे हैं। गंभीर बात ये है कि कोरोना वेव-1 की तरह वेव-2 भी यूथ पर भारी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की 501 मरीजों की स्टडी रिपोर्ट्स में इसका खुलासा हुआ है। पिछले 10 दिनों की स्टडी के अनुसार 213 युवा वायरस के मकड़जाल में फंस चुके हैं। साफ़ है कि यूथ रेड जोन में है। हालांकि वायरस हर उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। छोटे बच्चे भी इससे बच नहीं पा रहे। 1 साल के मासूम से लेकर 90 साल के उम्रदराज तक को ये अपने शिकंजे के जकड़ रहा है। वहीं खतरा युवाओं पर सबसे ज्यादा मंडरा रहा है.

ये है आंकडों की कहानी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी पिछले 10 दिनों की कोविड-19 रिपोर्ट के अनुसार जिले में सबसे ज्यादा शिकार 21 से 30 साल आयुवर्ग के नौजवान है। जबकि 31 से 40 साल की आयुवर्ग के लोग भी रेड जोन में हैं। 51 से 60 साल आयुवर्ग के लोग भी तेज़ी से वायरस की गिरफ्त में आ रहे है। विभाग की ओर से जारी आंकड़ों की बात करें तो साफ है कि नई पीढ़ी के लिए कोरोना कयामत साबित हो रहा है। इन मरीजों में ख़ास तौर पर स्टूडेंट्स और हाउस वाइफ शामिल हैं.

रेड जोन में यूथ, कोरोना बना घातक
नोट- आंकड़े 26 मार्च से 4 अप्रैल तक के हैं.

दस दिन में 500 पार हुआ आंकड़ा

मासूम भी चपेट में 
कोरोना वायरस का कहर मासूमों पर भी बराबर बरस रहा है. पिछले 10 दिनों में ही 34 बच्चे कोरोना से संक्रमित पाए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक 17 मासूम 0 से 5 साल के बीच के है। लो रिस्क कैटेगरी होने के बावजूद बड़ी संख्या में बच्चों का इंफेक्टड होना साबित करता है कि ये वायरस हर किसी के लिए घातक है। वहीं डॉक्टर्स का भी कहना है कि कोरोना का प्रभाव हर कैटेगरी बराबर है। सभी को एहतियात बरतने की जरूरत है.

2020 भी यूथ के लिए था भारी

2020 में अगस्त-सितंबर में भी युवाओं पर कोरोना वायरस का प्रकोप जबरदस्त असर दिखा रहा था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी मरीजों की रिपोर्ट में इसका भी खुलासा हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त और सितंबर में कुल 4158 मरीज सामने आए थे. इसमें 1911 मरीज अगस्त में मिले थे, जबकि 15 सितंबर तक 2247 मरीजों में वायरस की पुष्टि हुई थी. अगस्त में 40 साल तक के 910 मरज सामने आएं थे जबकि सितंबर में 1 हजार से ज्यादा मरीज इस कैटेगिरी में थे. खासतौर से 21 से 35 साल की नई पीढ़ी के करीब 50 प्रतिशत मरीज इसमें शामिल थे. 15 प्रतिशत मरीजों की उम्र 1 दिन से लेकर 15 साल के बीच थी.  50 प्रतिशत मरीज 41 से 90 साल के बीच में थे.

वीक इम्यूनिटी वजह
युवाओं का वायरस की चपेट में तेज़ी से आने का सबसे बड़ा कारण वीक इम्युनिटी है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डा. ज्ञानेंद्र कुमार बताते हैं कि युवा वर्ग नियमों का पालन करने में सबसे पीछे हैं. लाइफ स्टाइल भी काफी हद तक ठीक नहीं है। गलत आदतों के साथ ही मास्क और हाथ धोने में भी ये वर्ग सबसे ज्यादा लापरवाही बरत रहा है इससे इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो जा रहा है.इसके अलावा बाहर आने जाने वालों में भी ये समूह सबसे आगे है। इन लोगों को चाहिए कि वह कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए जारी गाइड लाइन्स का पालन निश्चित तौर पर करें.

इनका है कहना
वायरस का असर हर वर्ग पर पड़ रहा है. युवाओं का एक्स्पोजर सबसे ज्यादा होता है। नई उम्र के बच्चे मास्क भी नहीं लगाते जिसकी वजह से कोरोना संक्रमण इन्हें जल्दी घेर रहा है. इससे बचने का एकमात्र तरीका नियमों का पालन है.
डॉ. अखिलेश मोहन, सीएमओ, मेरठ

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