आईपीएल का टाइटल स्पांसर बनने के लिए अब पहली शर्त ये है कि उसके भारत के साथ अच्छे सम्बन्ध हों. कहा जा रहा है कि ये शर्त चीन के लिए है. चीन की मोबाइल फ़ोन कंपनी वीवो आईपीएल की टाइटल स्पांसर रह चुकी है. अब ऐसी किसी भी कंपनी को आईपीएल के लिए टाइटल स्पॉन्सरशिप नहीं मिलेगी जिसका सम्बन्ध भारत विरोधी देश से होगा, इसका सीधा मतलब ये हैं कि अब आईपीएल से चीन का किसी भी तरह का नाता नहीं रहेगा। कहा जा रहा है कि चीन के साथ भारत के रिश्ते अच्छे नहीं हैं इसलिए ये फैसला किया गया है.
स्पोर्ट्स वेबसाइट क्रिकबज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई ने IPL की टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए जो टेंडर निकाला है उसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि भारत के साथ जिन देशों के दोस्ताना संबंध नहीं हैं उनको इस टेंडर में तवज्जो नहीं दी जाएगी. BCCI ने 2024 की टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए बेस प्राइस 360 करोड़ रुपये प्रति साल है, टाइटल स्पांसरशिप पाने वालों के लिए इसके ऊपर बोली लगानी होगी, जिसकी बोली बड़ी होगी उसे टेंडर दिया जाएगा. बता दें कि चीनी फोन कंपनी वीवो आईपीएल का टाइटल स्पॉन्सर रह चुकी है लेकिन 2020 में सीमा पर तनाव के चलते जब हालात बिगड़े तब बीसीसीआई ने वीवो को आईपीएल से हटाने का फैसला लिया और टाटा टाइटल स्पॉन्सर के रूप में सामने आया.
बीसीसीआई ने अब अपने टेंडर में लिखा है कि किसी भी बिडर का ऐसे किसी देश से संबंध नहीं होना चाहिए जिसके सम्बन्ध भारत के साथ खराब हों. अगर कोई ऐसा कोई बिडर सामने आता है तो उसे BCCI को अपने शेयर होल्डर से जुड़ी सभी जानकारियां देनी होगी, उसके बाद ही उसे टेंडर में शामिल होने का मौका मिलेगा। इसी के साथ फैन्टसी गेम, क्रिप्टोकरेंसी और सट्टेबाजी से जुड़ी कंपनियों पर भी टाइटल स्पोंसरशिप के लिए बोर्ड ने रोक लगाई है. वहीँ जो कंपनियां स्पोर्ट्स वियर बनाती हैं वो भी टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए टेंडर नहीं कर पाएंगी.

