राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए आज संयुक्त विपक्ष की ओर से नामांकन करने के बाद एक पत्रकार वार्ता में यशवंत सिन्हा ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला है. यशवंत सिन्हा ने कहा कि आज की बीजेपी वह बीजेपी नहीं जब पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र होता था, मैं अपने ज़माने की बीजेपी की बात कर रहा हूँ. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का चुनाव निरंकुश शक्ति की विचारधारा से आज़ादी की लड़ाई है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति उसे बनना चाहिए जो सरकार का रबर स्टैम्प न हो, जो सरकार के कब्ज़े में हो.
कल यानि मंगलवार से अपना देशव्यापी अभियान शुरू करने का एलान करने वाले संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने उन सभी विपक्षी दलों का शुक्रिया भी अदा किया जिन्होंने उनमें विशवास जताया। यशवंत सिन्हा ने कहा कि बेशक मैं चौथे नंबर की चॉइस था मगर मैं 10 नंबर की चॉइस भी होता तो इस ऑफर को स्वीकार करता। उन्होंने कहा कि ये पद की गरिमा की लड़ाई है किन्ही दो व्यक्तियों का संघर्ष नहीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए मेरे नाम की घोषणा पहले हुई, सरकार को अगर इस पद के लिए सर्व सम्मति जुटानी होती तो उसे बात करना चाहिए था मगर उसने कोई बात नहीं की और द्रोपदी मुर्मू जी के नाम की घोषणा कर दी.
यशवंत सिन्हा ने कहा कि कहा जा रहा कि राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार किसी आदिवासी समुदाय के व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया जा रहा है, यह बात गलत है क्योंकि इससे पहले पी ए संगमा जी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ चुके हैं. उन्होंने देश की बदहाल अर्थ व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा, यशवंत सिन्हा ने कहा कि 2016 में यह कहकर नोटबंदी की गयी कि सारा काला धन बाहर आ जायेगा, आज वो काला धन और बड़ा होकर सिस्टम में वापस आ गया. उन्होंने कहा कि 2016 से देश की जीडीपी गिरने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि जबतक मेरे शरीर में रक्त की एक बूँद भी बाकी है मैं लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ता रहूंगा।

