लखनऊ। आज पृथ्वी दिवस के मौके पर प्रदेश में प्रत्येक जनपदों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जिसमें पृथ्वी के बचाव को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। वहीं बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गांवों में विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया। जिसमें भूगर्भ जल दोहन अधिनियम से भी अवगत कराया गया। विधि संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. एसके चड्ढा ने बताया कि यदि भूगर्भजल का दोहन अंधाधुंध तरीके से किया गया तो इसके लिए जेल के साथ ही दो लाख से 20 लाख तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
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भूगर्भ जल बचाने के लिए वर्ष 2019 में बने उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल अधिनियम में ये प्रावधान किया उन्होंने बताया कि भूगर्भ जल सुरक्षा, संरक्षण के अलावा नियंत्रण और इसके विनियमन करने को यह नियम बनाया गया है। इस नियम का उद्देश्य ग्रामीण और नगरीय इलाकों में भूगर्भ जल अनियंत्रित के अलावा तीव्र गिरावट राेकना है।
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लोकहित में भूगर्भ जल उपयोग के लिए 10 अध्याय और 52 धाराएं हैं। इस अधिनियम का उद्देश्य भूजल सेना बनाने और उसके द्वारा भूजल के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है। इसके अलावा भूगर्भ जल का प्रदूषण निवारण भी इस धारा के अंतगर्त आता है। इसमें विभिन्न राज्यों के अलावा जिला एवं स्थानीय स्तर पर विभिन्न अभिकरण और समितियों के गठन का प्रावधान भी किया गया है।

