आज 20 अक्टूबर 2022 गुरुवार को शाम 04:05 से 21 अक्टूबर शुक्रवार को शाम 05:22 तक एकादशी रहेगी। एकादशी का उपवास 21 अक्टूबर,शुक्रवार को रखा जाएगा। महीने में हर 15 दिन में एकादशी आती है। एकादशी व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है। लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्तियों को एकादशी नहीं रखनी चाहिए। द्वादशी को गोवत्स द्वादशी कहते हैं । इस दिन यानी 21 अक्टूबर 2022 शुक्रवार को दूध देने वाली गाय को बछड़े सहित स्नान कराकर वस्त्र ओढाना चाहिये।
गाय के गले में पुष्पमाला डाले,चन्दन का तिलक करें, ताम्बे के पात्र में सुगन्ध, अक्षत, पुष्प, तिल, और जल का मिश्रण बनाकर निम्न मंत्र से गौ के चरणों का प्रक्षालन करें। पूजा के बाद गाय को उड़द के बड़े खिलाकर प्रार्थना करें कि हे जगदम्बे ! हे स्वर्गवासिनी देवी ! हे सर्वदेवमयी ! मेरे द्वारा अर्पित ग्रास का भक्षण करो। हे समस्त देवताओं द्वारा अलंकृत माता ! नन्दिनी!मेरा मनोरथ पूर्ण करो। इसके बाद रात्रि में इष्ट , ब्राम्हण , गौ तथा अपने घर के वृद्धजनों की आरती करें। एकादशी के दिन ऐसा करने से घर में धनधान्य की कभी कमी नहीं होती है।

