कोरोना मरीजों को आपातकालीन उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के आदेश
नैनीताल। उत्तराखंड में बढ़ते कोरोना संक्रमण पर सरकार के प्रयासों का असर न होने से चिंतित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार का 10 निर्देश जारी किये हैं। राज्य में अस्पताल, आॅक्सीजन और आईसीयू आदि की उपलब्धता सहित अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिये हैं।
उत्तराखंड में बढ़ती कोरोना की रफ्तार सरकार के प्रयासों के बावजूद थमती नहीं दिख रही है। उत्तराखंड हाईकोर्ट राज्य में फैल रहे कोरोना संक्रमण और सरकार के प्रयासों पर लगातार नजर रखे हुए है। हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से पहाड़ के दुरस्त इलाकों में मोबाइल टेस्टिंग वैन की व्यवस्था करने, कोविड अस्पतालों की संख्या बढ़ाने, आईसीयू बेड बढ़ाने, अस्थायी अस्पताल बनाने और हर जिला अस्पताल में सिटी स्कैन के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा प्राइवेट अस्पताल के ओवरचार्ज रोकने के लिए सरकार को व्यवस्था करने का आदेश दिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि 25 प्रतिशत बीपीए परिवारों का इलाज प्राइवेट अस्पतालों द्वारा किया जाये। राज्य के अस्पतालों में आईसीयू बेड समेत दवा की जानकारी ऑनलाइन की जाये। कोर्ट ने 5 मई तक कोर्ट में राज्य के सचिव (मेडिकल) से डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी है। वहीं राज्य में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर नजर रखने के आदेश भी सरकार को दिये गये हैं।
राज्य में कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिये अनेक पाबंदियां भी लागू की जा चुकी हैैं। इनमें राज्य में लौट रहे प्रवासियों के लिए रजिस्ट्रेशन के साथ ही होम क्वारंटीन अनिवार्य कर दिया गया है। पूरे राज्य में रात नौ बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक नाइट कर्फ्यू के साथ ही वीकेंड पर रविवार को कर्फ्यू लगाया गया है। जबकि देहरादून में शनिवार को भी नाइट कर्फ्यू रहेगा। राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक आयोजनों में लोगों की संख्या सौ तक सीमित कर दी गई है।एलटी, नर्सिंग और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा स्थगित और दसवीं की बोर्ड परीक्षा रदद कर दी गई है। बाॅर्डर पर बिना कोविड निगेटिव रिपोर्ट के एंट्री बैन किया गया है। बिना माॅस्क घूमते पाए जाने पर जुर्माना बढ़ाकर पांच सौ रुपये कर दिया गया है। प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थान बंद करा दिये गये हैं।

