विश्व में पिछले 27 साल से विश्व विकलांगता दिवस मनाया जा रहा है। विकलांग, वे लोग कतई नहीं होते जिनमें कोई कमी हो, बल्कि ये वे लोग हैं जो ईश्वर के सबसे प्रिय हैं, इनके पास अलग गुण हैं। इन लोगों में आम लोगों की तुलना में अधिक आत्मबल और इच्छा शक्ति होती है जो कि इन्हें अन्य लोगों से खास बनाती है इसलिए भारत में प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह पर इन्हें दिव्यांग कहा जाने लगा। लेकिन आज भी विश्व में दिव्यांगों को लेकर कई सारी समस्याएं हैं। इन बाधा रूपी समस्याओं को मिटाने के लिए ही हम इस एक दिन को उत्सव के रूप में मनाते हैं।

इतिहास
अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रिय स्तर पर विकलांगों को उनके अधिकार मिलें, उनका विकास हो, उनके साथ भेदभाव न हो इस विचार को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने 1981 को ”विकलांग व्यक्तियों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष” घोषित किया गया। इसी संदर्भ में आगे कई सारी योजनाओं का भी निर्माण किया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1983 से 1992 को विकलांगों के लिए संयुक्त राष्ट्र के दशक की घोषणा की थी ताकि वो सरकार और संगठनों को इससे जुड़ी गतिविधियों को लागू करने के लिए एक लक्ष्य प्रदान कर सके। इसके बाद 1992 से 3 दिसंबर, विश्व विकलांगता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
विषय
विश्व विकलांगता दिवस के लिए प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक विषय तय किया जाता है। कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष का विषय थोड़ा अलग है। इसे कोरोना से जोड़कर रखा गया है। ‘बेहतर निर्माण: पोस्ट कोविड-19 के लिए विकलांग लोगों के साथ, के लिए एक सुलभ, समावेशी एवं संधारणीय विश्व का निर्माण’ इस वर्ष का विषय है। विकलांग दिवस के लिए पहला विषय ”पूर्ण सहभागिता और समानता” रखा गया था। इस विषय के तहत समाज में विकलांगों को बराबरी के अवसर, उनके अधिकारों के बारे में लोगों को जागरुक करने और सामान्य नागरिकों की तरह उनकी सेहत पर भी ध्यान देने के साथ सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारने आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
कैसे मनाया जाता है?
पूरे विश्वभर में विश्व विकलांगता दिवस को अलग- अलग तरह से मनाया जाता है। भारत में कला-प्रदर्शनियों का आयोजन होता है, जहां दिव्यांगों द्वारा बनाई गई विशेष कलाकृतियां प्रस्तुत की जाती है। इसके अलावा भाषण प्रतियोगिता, समूह चर्चा, कौशल प्रदर्शन के कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इन सभी आयोजनों के माध्यम से समाज में तालमेल बैठता है। इस वर्ष कोरोना के कारण अधिकांश कार्यक्रम ऑनलाइन ही होना है।
सामान्य लोग जब देखते हैं कि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से असक्षम है तो वे उसका उपहास बनाने लगते हैं। जबकि संभव है कि उसके पास कोई और गुण हो जो हमारे पास न हो। लेकिन शिक्षा के इतने प्रचार- प्रसार के बावजूद भी लोग यह बात समझ नहीं पाए हैं। इसलिए इस एक दिन दुनिया को ईश्वर की सभी संतानों के प्रति समान भाव रखने का संदेश दिया जाता है एवं दिव्यांगों की खूबियों के बारे में बताया जाता है।

