सुनील शर्मा
- यूपी के मुख्यमंत्री पद पर कार्यकाल पूरा करने वाले किसी भी सीएम को लगातार नहीं सौंपी गयी पद की जिम्मेदारी
- गोविंद बल्लतभ पंत, संपूर्णानंद, मायावती,अखिलेश यादव के बाद योगी आदित्यनाथ यूपी सीएम का कार्यकाल पूरा करनेकी ओर अग्रसर
न्यूय डेस्क। केंद्र की राजनीति उत्तर प्रदेश के गलियारों से होकर गुजरती है। मगर उत्तर प्रदेश की राजनीति में सदैव स्थिरता का अभाव रहा है। अनेक बार राष्ट्रपति शासन झेल चुके उत्तर प्रदेश ने राजनीति में खासा बदलाव देखा है। खासकर मुख्यमंत्री पद पर तो मानो कोई अभिशाप लगा हो। आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि आजादी के बाद अब तक उत्तर प्रदेश 21 मुख्यपमंत्री देख चुका है। गोविंद बल्लभ पंत, संपूर्णानंद, मायावती, अखिलेश यादव के बाद वर्तमान में सत्ता सिंहासन पर काबिज योगी आदित्यनाथ पांचवे ऐसे मुख्यपमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं जिन्होंने अपना मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल पूरा किया है। लेकिन अब तक के आंकड़े देखें तो अपना कार्यकाल पूरा करने वाले किसी भी मुख्यमंत्री को लगातार सीएम पद की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गयी है। अब देखना होगा कि क्याे योगी आदित्य्नाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से जुड़ा यह मिथक तोड़कर फिर से सीएम बन पाएंगे या उन्हें भी यूपी सीएम की कुर्सी पर लगा श्राप झेलना होगा।
आजाद हिंदुस्तान में उत्तर प्रदेश के सबसे पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत बने जिन्होंने 26 जनवरी 1950 से लेकर 28 दिसंबर 1954 तकमुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद संपूर्णानंद मुख्यमंत्री बने और उन्होंने 28दिसंबर 1954 से 7 दिसंबर 1960 तक सीएम पद की जिम्मेदारी संभाली। तीसरे मुख्यमंत्री चंद्र भानु गुप्ता रहे जो 7 दिसंबर 1960 से 2 अक्टूबर 1963 तक मुख्यमंत्री रहे। बतौर उत्तर प्रदेश की चौथी मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी ने 2 अक्टूबर 1963 से लेकर 14 मार्च 1967 तक मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद चंद्रभानु गुप्ता फिर से उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 14 मार्च 1967 से 3 अप्रैल 1967 तक मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहे। यह सभी मुख्यमंत्री कांग्रेस पार्टी के रहे और प्रदेश में कांग्रेस का एकतरफा राज कायम रहा। इसके बाद सत्ता में परिवर्तन हुआ और चौधरी चरण सिंह ने 3 अप्रैल 1967 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी ग्रहण की और वह 17 फरवरी 1968 तक मुख्यमंत्री बने रहे। आजाद हिंदुस्तान में पहली बार कांग्रेस के अलावा किसी और पार्टी का उत्तर प्रदेश की सत्ता पर राज हुआ और भारतीय लोक दल के नेता चौधरी चरण सिंह से इसकी शुरुआत हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 17फरवरी 1968 से लेकर 26 जनवरी 1969 तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा। इसके बाद कांग्रेस के चंद्र भानु गुप्ता 26 फरवरी 1969 से 18 फरवरी 1970 तक मुख्यमंत्री रहे।
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इसके बाद जनता का रुख बदला और भारतीय लोकदल के चौधरी चरण सिंह 18 फरवरी 1970 से 2 अक्टूबर 1970 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2 अक्टूबर 1970 से लेकर 18अक्टूबर 1970 तक उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से राष्ट्रपति शासन लगाया गया। इसके बाद त्रिभुवन नारायण सिंह 18 अक्टूबर 1970 से 4 अप्रैल 1971 और कमलापति त्रिपाठी 4 अप्रैल 1971से 12 जून 1973 तक बतौर कांग्रेसी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के सता सिंहासन पर काबिज हुए। उत्तर प्रदेश को एक बार फिर से राष्ट्रपति शासन का सामना करना पड़ा और12 जून 1973 से 8 नवंबर 1973 तक प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू रहा। इसके बाद एक बार फिर से कांग्रेसी मुख्यमंत्री सत्ता पर काबिज हुए और हेमवती नंदन बहुगुणा 8नवंबर 1973 से 30 नवंबर 1975 तक मुख्यमंत्री रहे।
राष्ट्रपति शासन लगने का सिलसिला जारी रहा और 30 नवंबर 1975 से 21 जनवरी 1976 तक उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगायागया। इसके बाद फिर से कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी 21 जनवरी 1976 से 30 अप्रैल 1977तक मुख्यमंत्री बने। 30 अप्रैल को 1977 को फिर से प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ जो 23 जून 1977 तक चला। इसके बाद की बाजी जनता पार्टी के हाथ में रही और राम नरेश यादव 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक और बनारसी दास 28 फरवरी 1979 से 17 फरवरी 1980 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। लेकिन प्रदेश में राजनीतिक खलबली मची रही और प्रदेश एक बार फिर से राष्ट्रपति शासन के हवाले हुआ। 17 फरवरी 1980 से 9 जून 1980 तक प्रदेश में राष्ट्रपति शासन रहा। इसके बाद बतौर 12वेंमुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह 9 जून 1980 से 19 जुलाई 1982, श्रीपति मिश्र 19 जुलाई 1982 से 3 अगस्त 1984, नारायण दत्तप तिवारी 3 अगस्त 1984 से 24 दिसंबर 1985, वीर बहादुर सिंह 24 दिसंबर 1985 से 25 जून 1988, नारायण दत्त तिवारी 25 जून 1988 से 5 दिसंबर 1989 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहे। यह सभी मुख्यमंत्री कांग्रेस पार्टी से थे।
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इसके बाद जनता दल के मुलायम सिंह यादव 5 दिसंबर 1989 से लेकर 24 जून 1991 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। सन 1991 में प्रदेश की सत्ता पर भाजपा का राज हुआ और कल्याण सिंह ने बतौर 16वें मुख्यमंत्री 24जून 1991 से 6 दिसंबर 1992 तक सत्ता का सिंहासन संभाला। 6 दिसंबर 1992 को उत्त र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा जो 4 दिसंबर 1993 तक चला। इसके बाद हुए चुनाव में सपा ने बाजी मारी और मुलायम सिंह यादव एक बार फिर 5 दिसंबर 1993 से 3 जून 1995 तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद मायावती राज का दौर शुरू हुआ और 3 जून 1995 से 18 अक्टूबर 1995 तक मायावती प्रदेश के मुख्यमंत्री रहीं। राष्ट्रपति शासन एक बार फिर से प्रदेश में लगा और 18अक्टूबर 1995 से 21 मार्च1997 तक चला।
इसके बाद एक बार फिर मायावती 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक मुख्यमंत्री रहीं। प्रदेश की जनता ने मन बदला और भाजपा के कल्याण सिंह 21 सितंबर 1997 से 12 नवंबर 1999 तक, रामप्रकाश गुप्त 12 नवंबर 1999 से 28 अक्टूबर 2000 तक, राजनाथ सिंह 28 अक्टूबर 2000 से 8 मार्च 2002 तक मुख्यमंत्री रहे। राष्ट्रपति शासन फिर से लगा और 8 मार्च 2002 से 3 मई 2002 तक चला। इसके बाद बसपा की मायावती ने 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक मुख्यमंत्री पद संभाला। 2003 में समाजवादी पार्टी का परचम लहराया और मुलायम सिंह यादव 29 अगस्त 2003 से 13 मई 2007तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद फिर सत्ताल पलटी और बसपा की मायावती ने 13 मई 2007 से 15 मार्च 2012 तक मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद समाजवादी पार्टी चुनाव में विजयी हुई और अखिलेश यादव 15 मार्च 2012 से 19 मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा बहुमत से जीती और तब से वर्तमान समय तक योगी आदित्यनाथ प्रदेश की प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं।
आंकड़े साफ जाहिर करते हैं कि प्रदेश में अब तक किसी भी मुख्यमंत्री ने लगातार सीएम पद की जिम्मेदारी नहीं संभाली है। 3 जून 1995 को यूपी सीएम का पद ग्रहण करने वाली बसपा की मायावती जरूर 21 मार्च 1997 में लगातार मुख्यमंत्री बनीं मगर उनके दो कार्यकाल के बीच राष्ट्रपति शासन भी लगा और दोनों ही बार वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पायीं।अब देखना है कि 2017 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभालने वाले योगी आदित्यनाथ क्या 2022 में होने वाले चुनाव में पार्टी को जीत दिलाकर फिरसे सीएम पद पर काबिज हो सकेंगे।
यदि योगी आदित्यनाथ ऐसा कर पाये तो यूपी के मुख्यमंत्री पद से जुड़ा मिथक तोड़ने का श्रेय भी उनको मिलेगा। वह बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा कर लगातार सीएम बनने का रिकॉर्ड बनाने में भी कामयाब होंगे।

