अमित बिश्नोई
गौतम गंभीर अपने नाम की तरह ही काफी गंभीर हैं, अपने काम में भी और अपने स्वभाव में भी. उनकी ये विशेषताएं उनके काम में भी झलकती हैं और नतीजों में भी. जबतक वो टीम इंडिया के सदस्य रहे उनके मुंह से ज़्यादा उनका बल्ला बोला। गंभीर ने दो बार आईपीएल में केकेआर को अपनी कप्तानी में चैंपियन बनाया और इसबार वो केकेआर की टीम के मेंटोर हैं और टीम किस तरह का प्रदर्शन कर रही है , किसी से छिपा नहीं है. इधर टीम इंडिया के नए हेड कोच की तलाश शुरू हो चुकी है क्योंकि राहुल द्रविड़ इस टी 20 विश्व कप के बाद टीम से अलग हो जायेंगे। BCCI ने नए कोच के लिए विज्ञापन दे दिया है जिसमें आवेदन की अंतिम तारीख 27 मई है, लेकिन जानकारी मिली है कि बोर्ड ने गौतम गंभीर से इस बारे में कांटेक्ट किया है. तो क्या गंभीर राहुल द्रविड़ की जगह लेने जा रहे हैं?
जो जानकारी सामने आयी है उसके मुताबिक BCCI ने राहुल द्रविड़ को मनाने की बहुत कोशिश कि लेकिन द्रविड़ ने साफ़ तौर से अपने कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया है. बोर्ड ने द्रविड़ से यहाँ तक कहा कि अगर सभी प्रारूप के नहीं तो कम से कम टेस्ट टीम के लिए वो हेड कोच बने रहे लेकिन द्रविड़ उसके लिए भी तैयार नहीं हुए. अब पता चला है कि बोर्ड ने गौतम गंभीर से संपर्क किया है. दरअसल गंभीर के केकेआर से जुड़ने के बाद टीम की काया पलट गयी है. मुख्य खिलाड़ी केकेआर में आज भी वही हैं जिनके दम पर गंभीर ने केकेआर को दो बार चैंपियन बनाया था, उनमें सुनील नरेन् का नाम है, आंद्रे रसेल का नाम है, नितीश राणा का नाम है लेकिन गंभीर के जाने के बाद जो भी आया उसने इन खिलाडियों का इस्तेमाल उस तरह नहीं किया जैसा गंभीर ने किया था, नतीजा ये रहा कि इतने बरसों में केकेआर की टीम कभी फाइनल में भी नहीं पहुँच सकी. गंभीर की गैरमौजूदगी में उसका प्रदर्शन उतार चढाव वाला रहा. उसका प्रदर्शन टुकड़ों में विभाजित हो गया, निरंतरता गायब हो गयी.
अब केकेआर में वापसी के बाद गौतम गंभीर ने टीम के बिखरे कॉम्बिनेशन को संवार दिया। अपने समय के और आज के समय के खिलाडियों को इस ढंग से संयोजित किया कि कई सालों से बिखरी टीम एकबार फिर संयोजित होती हुई नज़र आयी. आंद्रे रसेल का फिर से सही इस्तेमाल होने लगा और काफी समय बाद उनमें गेंद और बल्ले दोनों से पुराने आंद्रे की झलक नज़र आयी. सुनील नारायण को एकबार अपनी पुरानी पोजीशन मिल गयी और आज आलम ये है कि वो केकेआर की ओर से सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं , एक सलामी बल्लेबाज़ के रूप में उनके बल्ले से सिर्फ विस्फोटक बल्लेबाज़ी ही नहीं हो रही है बल्कि वो लम्बी पारियां खेल रहे हैं जिसमें उनके जीवन का पहला टी 20 शतक भी शामिल है. गंभीर ने एकबार फिर सुनील नरेन् को सलामी बल्लेबाज़ी की भूमिका देकर नरेन् से उनका 100 प्रतिशत निकलवाया। नरेन् ने भी मौके फायदा उठाया और गंभीर की हौसलाअफ़ज़ाई से उनका जोश भी कई गुना बढ़ गया जो उनके खेल में झलक रहा है।
ऐसे में BCCI को लगा कि भले ही उन्होंने नए कोच के लिए विज्ञापन दे दिया है लेकिन अगर गंभीर से इस बारे में सीधा संपर्क किया जाय तो ज़्यादा अच्छा होगा। जो लोग गंभीर का मिजाज़ जानते हैं वो इस बात को भी अच्छी तरह जानते हैं होंगे कि गौतम गंभीर खुद कभी टीम इंडिया के कोच के लिए आवेदन नहीं करेंगे। गंभीर ने अबतक अपने कैरियर में कभी भी किसी स्तर पर टीम की कोचिंग नहीं की है, इससे पहले वो लखनऊ सुपर जायंट्स के 2022 और 2023 में मेंटोर रहे हैं। 2022 में LSG की टीम फाइनल खेली थी हालाँकि उसे हार्दिक की गुजरात टाइटंस के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था, 2023 में भी LSG प्ले ऑफ़ खेली थी. इस बार केकेआर का मैनेजमेंट गंभीर को अपने साथ जोड़ने में कामयाब हो गया और उसका नतीजा भी उन्हें मिला। प्ले ऑफ में सबसे पहले पहुँचने वाली टीम वो बनी और अभी अंक तालिका में टॉप पर है, अगर अंतिम मैच में उसे हार नहीं मिली तो वो टॉप पर बनी रहेगी। मतलब फाइनल के लिए उसे दो मौके मिलना तय हैं. तो बिना कोच बने ही गंभीर के पास टीम इंडिया का कोच बनने का ऑफर पहुँच गया है. अब देखना है कि गंभीर क्या BCCI के इस ऑफर को स्वीकार करते हैं? ये इतना आसान नहीं है, टीम इंडिया में विराट कोहली मौजूद हैं और उनका क्या स्थान है सभी को मालूम है. क्रिकेट से लगाव रखने वाले ये भी अच्छी तरह जानते हैं कि गंभीर और विराट के रिश्ते कैसे हैं। हालाँकि आईपीएल में मैदान पर कई बार दोनों खिलाडी एक साथ दिखाई दिए लेकिन सभी जानते हैं दोनों ही एक दूसरे को पसंद नहीं करते। ऐसे में गंभीर अगर टीम इंडिया के कोच बनते हैं तो अहम् का टकराव हो सकता है और गंभीर कभी नहीं चाहेंगे कि इन हालात में वो टीम इंडिया के हेड कोच की ज़िम्मेदारी संभालें।

