अबकी बार धरती के भगवानों के नाम क्यों रहा योगी का बजट?

आर्टिकल/इंटरव्यूअबकी बार धरती के भगवानों के नाम क्यों रहा योगी का बजट?

Date:


अबकी बार धरती के भगवानों के नाम क्यों रहा योगी का बजट?

नवेद शिकोह

अबकी बार धरती के भगवानों के नाम क्यों रहा योगी का बजट?

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का अंतिम बजट धर्म-संस्कृति, श्री राम-अयोध्या और प्रतिमाओं की अपेक्षाओं के विपरीत साबित हुआ। इस बार धरती के भगवानों को समर्पित बजट में चुनाव के लुभावने रंग साफ दिखे। किसान आंदोलन और रेप/नारी उत्पीड़न की कुछ घटनाओं से अन्नदाताओं और नारी शक्ति के नाराज चेहरों पर खुशी लाने की कोशिश की गई है।

दिल्ली बार्डर पर डटे किसान आंदोलन के तंबू भले सी सन्नाटे मे हों पर इन तंबुओं की हवा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान पंचायतों की आंधी ला चुकी है।
दस महीने बाद यूपी के विधानसभा चुनाव की तारीखे घोषित होनी है। किसानों को मनाने और विश्वास मे लेने की कोशिशों में योगी सरकार का ये बजट किसानों को लुभाने का एक टूल भी बनाया गया है।

हाथरस के अतिरिक्त अन्य जिलों में नारी उत्पीड़न की घटनाओं से आधी आबादी की नाराजगी चुनावी बेला में अपना असर ना दिखा दे इसलिए योगी सरकार निरन्तर महिला सुरक्षा को लेकर सजग हुई है। इसी कड़ी में योगी सरकार के इस कार्यकाल के आम बजट में नारी शक्ति को खुश करने की कोशिश की है।
नारी को देवी और किसान को अन्नादाता यानी भगवान/खुदा मानकर इस बार किसी धर्म नगरी, संस्कृति या प्रतिमाओं के बजाए धरती के भगवानों पर धनवर्षा की गई है। बजट के व्यवहार ने किसानों की नाराजगी और चुनावों की नजदीकी का अहसास बखूबी दिखाया है। आम जनता की बुनियादी जरुरतों, छोटे उद्योगों के महत्व, नौजवानों की बेरोजगारी का अहसास, कोरोना और तमाम स्वास्थ्य संबंधित आवश्यकताओं की फिक्र भी बजट में दिखी।
भगवान के बजाय इंसानों पर केंद्रित बजट में धरती के भगवानों को रिझाने और नाराज तब्को को मनाने की कोशिश बता रही है कि ये आम बजट चुनावी चाशनी में डूबा हुआ है।

जब हमें महसूस होता है कि हमसे भगवान नाराज़ है और इस कारण कोई विपत्ति आ सकती है तो हमारा स्वभाव ही बदल जाता है। हमारी सेवा, आराधना और आस्था भगवान के प्रति बढ़ जाती है। रोज की अपेक्षा प्रसाद ज्यादा चढ़ते हैं। खूब पूजा-अर्चना और आरती करते हैं।

हमारे देश में किसान को भगवान का दर्जा दिया गया है। कृषक को अन्नदाता यानी अन्न का भगवान या खुदा कहा जाता है। महिला को भी हम देवी का दर्जा देते हैं। कहा जाता है कि मां के पैरों में जन्नत है। जन्नत जैसे मुकद्दस स्थान को मां के पैरों तले माना गया। सियासत मे भी महिलाओं, किसानों और नौजवानों को विश्वास में ले लेने से सियासी नइया पार हो जाती है। पर इन तब्कों का नाराज होना भगवान की नाराजगी जैसी होती है।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का अंतिम बजट कई मामलों में ऐतिहासिक और शतरंज की चालों जैसा भी दिखा। धर्म की मजबूत गोट को सेफ मानकर इससे बेफिक्र होकर धरती के भगवानों को विश्वास की बिसात पर सुरक्षित रखने के दांव खेले गए।

धर्म-संस्कृति, श्री राम-अयोध्या और मूर्तियों के बजाय किसान, मजदूर और महिलाओं पर बजट ने ज्यादा मेहरबानी बरती। किसानों और महिलाओं का विश्वास जीतना योगी सरकार ने अपना पहला धर्म समझा।

इन तमाम खूबियों के साथ इसको ऐतिहासिक इसलिए भी कहा गया कि ये यूपी का सबसे बड़ा बजट रहा। पहला पेपर लेस बजट था।

खास बात ये थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जैसा अति आत्मविश्वास दिखाते हुए ये नहीं कहा कि निश्चित तौर पर अगला बजट भी मैं ही पेश करुंगा।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related