पूजा-अर्चना देवी-देवताओं से जुड़ने का एक माध्यम है और यह ईश्वर के प्रति आस्था, श्रद्धा और विश्वास को दर्शाता है। पूजा के समय व्यक्ति पूरी तरह से भगवान के प्रति समर्पित हो जाता है और मन में सकारात्मक ऊर्जा महसूस करता है। इससे मन में शांति और सद्भाव का एहसास होता है। लेकिन शास्त्रों में देवी-देवताओं की पूजा करते समय कुछ सावधानियां बरतने को भी कहा गया है। पूजा-पाठ के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं, इन नियमों को ध्यान में रखकर ही देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए, अन्यथा देवी-देवता नाराज हो जाते हैं और पूजा का शुभ फल नहीं मिल पाता है। आइए जानते हैं पूजा करते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए।
इनसे निवृत्त होकर ही पूजा करें
शौच और स्नान के बिना पूजा नहीं करनी चाहिए। पूजा हमेशा इन चीजों से निवृत्त होने के बाद ही करनी चाहिए। साफ-सुथरे तरीके से की गई पूजा ही शुभ फल देती है। अगर आप पूजा-पाठ में साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं तो देवी-देवता नाराज हो जाते हैं और आपको जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस समय पूजा न करें
पूजा का एक नियम यह भी है कि दोपहर के समय देवी-देवताओं की पूजा नहीं करनी चाहिए। इस समय की गई पूजा स्वीकार्य नहीं होती है। ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार, दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच का समय देवताओं के लिए विश्राम का समय माना जाता है, इसलिए इस समय की गई पूजा का फल नही मिलता है और उनके आराम में खलल पड़ता है।
इस समय पूजा वर्जित है
शाम की आरती के बाद पूजा करना वर्जित बताया गया है। वेदों में रात्रि के समय सभी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान वर्जित माने गये हैं। वैसे तो कुछ विशेष दिन जैसे दिवाली, होली, करवा चौथ आदि का उपयोग पूजा के लिए किया जा सकता है, लेकिन अन्य दिनों में शाम की आरती के बाद पूजा नहीं करनी चाहिए। आरती के बाद देवता विश्राम करने चले जाते हैं और उस समय पूजा करने से उनका विश्राम भंग हो जाता है इसलिए इस समय पूजा नहीं करनी चाहिए।
इस समय महिलाओं को नहीं करनी चाहिए पूजा
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा नहीं करनी चाहिए। इस समय व्रत तो रखा जा सकता है लेकिन मूर्ति को नहीं छूना चाहिए, ऐसी धार्मिक मान्यता है। इस समय किसी को दान नहीं देना चाहिए। पुराणों में कहा गया है कि इस समय शरीर की शुद्धि की प्रक्रिया चल रही होती है, इसलिए इस समय महिलाओं को सांसारिक कार्यों और देवी-देवताओं के कार्यों से मुक्त कर दिया गया है। इस समय महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए और आराम करना चाहिए। मासिक धर्म के दौरान मानसिक जप शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है।
इस समय पूजा करना वर्जित है
जब घर में किसी का जन्म या मृत्यु होती है तो सूतक लगाया जाता है, ऐसे समय में देवी-देवताओं की पूजा करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि सूतक समाप्त होने के बाद ही भगवान की पूजा-अर्चना और स्पर्श करना चाहिए। सूतक के समय उन सभी घरों में सूतक लग जाता है जहां खून के रिश्ते होते हैं, इसलिए इस समय पूजा करना सही नहीं माना जाता है।

