नई दिल्ली। किसी भी राजनीतिक दल से जुड़कर उसके राजनीतिक रणनीतिकार बनने वाले प्रशांत किशोर आखिर ब्रेक क्यों लेना चाहते हैं? आखिर यकायक हुआ क्या? यह सवाल इसलिए संजीदा है क्योंकि, बीते दिनों उनकी कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें न केवल तेज थीं बल्कि उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से बातचीत, मुलाकातें भी चल रहीं थीं। मालूम हो कि, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रमुख सलाहकार के पद से इस्तीफा ऐसे नाजुक समय में दिया है, जबकि अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव है। …और इसी साल बीती 1 मार्च को ही प्रशांत किशोर अमरिंदर सिंह के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त प्रमुख सलाहकार बने थे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रमुख सलाहकार के पद से प्रशांत किशोर ने यह कहते हुए इस्तीफा दिया है कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका से अस्थायी ब्रेक लेने का फैसला किया है। अब ऐसे में उन अटकलों का क्या कि, प्रशांत किशोर कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं?
अपने इस्तीफा-पत्र में प्रशांत किशोर ने लिखा है कि, जैसा कि आप जानते हैं सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका से अस्थायी अवकाश लेने के मेरे निर्णय के मद्देनजर, मैं आपके बतौर चीफ एडवाइजर जिम्मेदारियों को संभालने में असक्षम हूं। इस पद के लिए मुझे चुनने और अवसर देने के लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मुझे चूंकि अपने भविष्य के कार्य के बारे में निर्णय लेना है, इसलिए मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि, मुझे इस जिम्मेदारी से आजाद करने की कृपा करें।
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गौर हो कि, प्रशांत किशोर ने साल 2017 में पंजाब विधानसभा के दौरान कांग्रेस के चुनाव अभियान की कमान संभाली थी। प्रशांत किशोर की बनायी कंपनी इंडियन पालिटिकल एक्शन कमेटी-आईपीएसी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को विजय दिलवाने में अहम भूमिका निभायी। प्रशांत किशोर ने वर्ष 2014 के लोकसभा इलेक्शन में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के लिए अभियान की भी कमान संभाली थी और मिशन में सफल भी हुये।

