Gujarat Chunavi Dangal – गुजरात मे इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को हैं। सभी राजनीतिक दल मैदान में अपने प्रतिद्वंद्वी को धूल चटाने के उद्देश्य से उतर चुके हैं। गुजरात की राजनीति में जातिय राजनीति की एक अनोखी झलक देखने को मिलती है। गुजरात मे जहां सभी राजनीतिक दलों की नजर पाटीदार समाज पर है वही गुजरात के रण में एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी की एंट्री हुई है जिसके बाद से गुजरात के राजनीतिक दलों की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर टिक गई है। क्योंकि गुजरात की राजनीति में मुस्लिम सिर्फ वोट बैंक नहीं है बल्कि निर्णय समुदाय है जो यह निर्धारित करता है कि गुजरात मे किसका राज होगा और कौन गुजरात मे बड़े दल के रूप में उभरेगा।
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गुजरात की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक की अलग भूमिका है। गुजरात की 10 फीसदीं आबादी मुस्लिम समुदाय की है। यह 10 फीसदीं आबादी गुजरात की 25 विधानसभा सींटो पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं और इन सींटो पर उसको ही जीत हासिल होती है मुस्लिम समाज जिसके समर्थन में होता है। वही एक दिलचस्प बात यह भी है कि गुजरात मे 25 सींटो पर मुस्लिम की धमक होने के बाद भी यहाँ मुस्लिम प्रतिनिधि का जलवा नहीं देंखने को मिलता है यहाँ मुस्लिम समाज जाति के नाम पर नहीं अपितु कैंडिडेट के व्यक्तिगत व्यवहार के नाम पर मतदान करता है। पिछले साल गुजरात मे सिर्फ 4 मुस्लिम विधायक बने थे।
मुस्लिम सींट पर राजनीतिक परिदृश्य
गुजरात मे होने वाले चुनाव की अभी तारीख घोषित नहीं हुई है लेकिन यह सुनिश्चित है कि इस साल के अंत तक गुजरात मे चुनाव होगा। वैसे तो सभी राजनीतिक दलों ने गुजरात को जीतने की कवायद तेज करदी है और यहाँ बड़े नेताओं का दौरा भी आरम्भ हो गया है। लेकिन अगर हम मुस्लिम विधानसभा सींट के राजनीतिक परिदृश्य को समझे तो सींधे तौर पर राजनीतिक दल यहाँ धर्म का ताना बाना बुनने में लगे हैं। वही ओवैसी ने यहां खुद को मुस्लिम हितैषी बताकर जनता को भेदने का नया जाल फेंका है। मुस्लिम वोट बैंक भाजपा से रुष्ट है और अगर भाजपा ने उनके लिए कोई हितकारी नीति नहीं लागू की तो ओवैसी भाजपा द्वारा गुजरात मे देखे जा रहे विजय के सपने पर ग्रहण बन सकते हैं। हालाकि गुजरात मे ओवैसी की सरकार नहीं बनेगी लेकिन उनकी मुस्लिम हितैषी राजनीति का फायदा आप या कांग्रेस उठाकर इन विधानसभा सींटो पर अपनी धाक जमा सकती है।
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कांग्रेस के साथ मुस्लिम समाज
गुजरात का मुस्लिम समाज कांग्रेस के समर्थन में है और कांग्रेस मुस्लिम समाज को अपने साथ लेकर चल रही है। गुजरात की राजनीति में वैसे तो कांग्रेस ने सभी धर्मो को अपने खेमे में करने की कोशिश की है । लेकिन मुस्लिम समाज ने कांग्रेस को अपने साथ कर लिया और अब तक गुजरात की राजनीति में कांग्रेस की ओर से मुस्लिम समाज के प्रत्याशियों को सबसे अधिक मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने 2017 में 6 मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा। जिंसमे 4 प्रत्याशियों की जीत हुई। वही 2012 में कांग्रेस की ओर से 2 प्रत्याशियों की जीत हुई। 1980 में कांग्रेस की ओर से 17 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में थे और 12 ने जीत हासिल की और 1990 में 11 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतरे और केवल 2 को जीत हासिल हुई। कांग्रेस ने इंदिरा गांधी के जमाने से मुस्लिम समाज पर अपनी धाक जमा रखी है और वह मुस्लिम का विश्वास बनी हुई है लेकिन इस बार ओवैसी गुजरात मे मुस्लिम हितैषी बनकर आए हैं अब ऐसे में मुस्लिम समाज क्या कांग्रेस पर से अपना विश्वास हटा देगी।

