मेरठ। राकेश और मनीषा की शादी दिसंबर 2011 में धूमधाम के साथ शादी हुई। कुछ दिनों के बाद राकेश ने पत्नी से अलग होने की बात रख दी। आरोप था कि पत्नी के शरीर पर सफेद निशान देखे हैं। पता चला कि वह केलोइड नामक बीमारी से पीड़ित हैं उसका इलाज भी चल रहा है। पति का कहना था कि शादी से पहले इस समस्या को छिपाया गया है। राकेश ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। अदालत ने त्वचा रोग के आधार पर तलाक देने की याचिका को खारिज कर दिया। यह भी आदेश दिया कि जब तक वह मनीषा को वापस नहीं ले जाता तब तक हर महीने 20 हजार रुपए दें। यह स्त्री के अधिकारों का हनन है।
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असल में देश में कई ऐसे मामले सामने आते हैं। जिसमें त्वचा रोगों, विशेषकर विटिलिगो (सफेद दाग) के कारण वैवाहिक रिश्ते टूटते हैं। सफेद दाग को मेडिकल में त्वचा रंग में होने वाली परेशानी से हुई बीमारी माना जाता है। रोगी के लिए यह शारीरिक समस्या से ज्यादा मानसिक, हीन भावना और अवसाद पैदा करती है।
25 जून को वर्ल्ड विटिलिगो डे मनाया जाता है। जिससे सफेद दाग की समस्या के बारे में जागरूक किया जा सके। विटिलिगो त्वचा की समस्या ही माना जाए। ये मानसिक बीमारी को जन्म न देने पाए।
मेडिकल भाषा में विटिलिगो या सफेद दाग स्किन पिगमेंटेशन बीमारी मानी जाती है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है। दुनिया में आबादी का लगभग 1.5 प्रतिशत लोग इससे ग्रसित है। चिकित्सक मानते हैं कि जन्मजात सफेद दाग की समस्या रोगियों के लिए मानसिक बोझ बनती है।
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आंकड़े की माने तो 25 प्रतिशत लोगों में यह बीमारी 10 साल की आयु से पहले हो जाती है। देश में राजस्थान और गुजरात में सफेद रोग के सबसे ज्यादा मामले हैं।

