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हिंदू पर्वों पर ही क्यों आती है आंदोलन की बाढ़ः जितेंद्रानंद सरस्वती


हिंदू पर्वों पर ही क्यों आती है आंदोलन की बाढ़ः जितेंद्रानंद सरस्वती

हिंदू विरोधी हैं लखीमपुर खीरी की घटना का विरोध करने वाले

वाराणसीकिसान आंदोलन की आड़ में छिपा हिंदू विरोध का विकृत चेहरा सामने आने लगा है। ईद, बकरीद, मुहर्रम और ईसाईयों के त्योहारों के दौरान देश में कोई आंदोलन नहीं होता, मगर हिंदुओं के पर्व आते ही चारो ओर आंदोलनों की बाढ़ आ जाती है। लखीमपुर खीरी की घटना का विरोध करने वाले हिंदू विरोधी हैं। पिछले साल दीपावली का पर्व शाहीन बाग आंदोलन के कारण प्रभावित हुआ था तो इस साल दशहरा पर आंदोलकारी पीएम मोदी का पुतला फूंकने की बात कह रहे हैं। यह साबित करता है कि यह आंदोलन केवल हिंदू विरोधी है।

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यह कहना है अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के सचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जिनका मानना है कि किसान आंदोलनकारियों के वेश में ईसाई मिशनरी, खालिस्तानी और आईएसआई के एजेंट माहौल बिगाड़ रहे हैं। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध करने के अधिकार का दुरूपयोग किया जा रहा है।

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लोकतंत्र के इस अधिकार का दुरुपयोग हो रहा है। बीते दिनों इसके बाद हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाने का काम किया जा रहा है। किसान आंदोलन का मुखौटा लगाकर विराट हिंदू धर्म और संस्कृति को विकृत करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। ये तथाकथित खालिस्तानियों का आंदोलन है जिसमें सारे आतंकवादी दस्ते शामिल हो गये हैं। कृषि कानूनों का विरोध अब हिंदू विरोध में बदल चुका है। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने देश-दुनिया के सनातन धर्माचार्यों और हिंदू धर्मावलंबियों से हिंदू सौहार्द्र बिगाड़ने या कोशिश करने वालों को मुंह तोड़ जवाब देने की अपील की है। उनका कहना है कि दशहरा और दीपावली में हिंदू प्रतीक चिन्हों को निशाना बनाया जाएगा। हिंदू धर्माचार्य, हिंदू समाज और विशेषकर अखिल भारतीय संत समिति इस कुत्सित मंशा को कभी सफल नहीं होने देगी।

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