करहल में किसकी जीत?

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तौक़ीर सिद्दीकी
उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में करहल विधानसभा सीट ऐसी सीट है कि जिस पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं क्योंकि यहाँ पर मामला परिवार से आता है, यूपी में परिवार का मतलब यादव परिवार से आता है। यह चुनाव मुलायम सिंह यादव के दामादों और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवारों के बीच लड़ा जा रहा है। सपा की ओर से पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव प्रत्याशी हैं, जो लालू प्रसाद यादव के दामाद हैं। वहीं भाजपा प्रत्याशी अनुजेश यादव मुलायम सिंह यादव के दामाद हैं। इसीलिए पूरा यादव परिवार करहल में डेरा डालकर अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए प्रचार कर रहा है, लेकिन सच्चाई ये है कि यादव परिवार का अधिकांश सपोर्ट ज्यादातर तेज प्रताप के साथ नज़र आ रहा है। मैनपुरी से सांसद अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने अपने परिवार के साथ तेज प्रताप के प्रचार के लिए मैनपुरी में डेरा डाल रखा है।

राजनीतिक हालात पर गौर करें तो करहल उपचुनाव में सिर्फ अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि पूरे सैफई परिवार यानि की यादव परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अगर करहल में समाजवादी पार्टी का वोट बैंक कम होता है और भाजपा को बढ़त मिलती है, तो इसका बड़ा पैगाम 2027 तक जायेगा और सिर्फ आगामी विधानसभा ही नहीं बल्कि पूरे देश में जायेगा और यही वजह है कि इस बार प्रदेश की भाजपा सरकार के कई मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां दो बार जनसभा कर चुके हैं। वैसे करहल में बसपा का प्रत्याशी भी मैदान में है, लेकिन उसकी मौजूदगी वोटकटवा से ज्यादा कुछ नहीं है। मतदाताओं की बात करें तो इस सीट पर 2.07 लाख मतदाता हैं, जिनमें ब्राह्मण और दलित एक लाख से ज्यादा वोट लेकर सबसे आगे हैं, जबकि पिछड़ा वर्ग और सवर्ण वोटों का बोलबाला है। मैनपुरी की इस विधानसभा सीट का नाम जितना उलझा हुआ है, यहां के राजनीतिक समीकरण भी उतने ही पेचीदा हैं।

विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद से 2002 के चुनाव को छोड़कर इस सीट पर समाजवादी पार्टी का दबदबा बरकरार रहा है। 2002 में सोबरन सिंह यादव भाजपा के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद वह साइकिल पर सवार हो गए और लगातार तीन बार सपा के टिकट पर यहां से विधायक चुने गए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 2022 का विधानसभा चुनाव सोबरन सिंह को अपना प्रस्तावक बनाकर लड़ने का फैसला किया। अखिलेश ने करहल से चुनाव लड़ा और भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री डॉ. एसपी सिंह बघेल को पटखनी देकर भरी बहुमत से जीत हासिल की। 2024 में कन्नौज से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने करहल से इस्तीफा दे दिया था। राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाली करहल सीट पर इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प है। समाजवादी पार्टी प्रत्याशी तेज प्रताप यादव की शादी लालू प्रसाद की छोटी बेटी राजलक्ष्मी से हुई है। भाजपा प्रत्याशी अनुजेश यादव की शादी मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई अभयराम यादव की बेटी और सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या उर्फ ​​बेबी यादव से हुई है। भाजपा उम्मीदवार अनुजेश पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव के साले भी हैं। ऐसे में करहल का मुकाबला इस बार राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। यहां न सिर्फ दो नेताओं बल्कि दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा भी सवाल बन रही है। इस चुनाव पर उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।

2019 में भाजपा में शामिल होने के बाद सांसद धर्मेंद्र यादव ने अनुजेश प्रताप से संबंध खत्म कर लिए थे। इसके लिए उन्होंने बाकायदा पत्र जारी कर इसकी घोषणा भी की थी। सपा उम्मीदवार तेज प्रताप यादव और भाजपा प्रत्याशी अनुजेश यादव भी करीबी रिश्तेदार हैं। अनुजेश यादव की पत्नी संध्या यादव तेज प्रताप यादव की बुआ हैं। ऐसे में दोनों में चाचा-भतीजा का सम्बन्ध है, लेकिन दोनों ही अब कह रहे हैं कि पार्टी रिश्तों से बड़ी होती है। 2019 से पहले अनुजेश यादव भी साइकिल पर सवार थे। उनकी पत्नी संध्या यादव 2015 में सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष मैनपुरी भी रह चुकी हैं। ऐसे में देखने वाली बात ये है कि परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी की साइकिल को दौड़ाने वाली करहल सीट क्या इस बार भी अपनी परंपरा कायम रखेगी या फिर यहाँ से कमल खिलेगा। बहरहाल करहल सीट से सपा जीते या फिर भाजपा, जीतेगा तो यादव परिवार ही.

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