यूपी में कोरोना प्रबंधन को लेकर डब्लूएचओ (WHO) ने सरकार के प्रयासों को सराहा
यूपी में कोरोना रोकथाम के सरकारी दावों पर भाजपा के नेता ही उठा रहे सवाल
अमित बिश्नोई
न्यूज डेस्क। एक ओर जहां डल्बूएचओ ( WHO) कोरोना प्रबंधन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की तारीफ कर रहा है वहीं दूसरी ओर भाजपा के ही मंत्री और विधायक यूपी में कोरोना रोकथाम के सरकारी दावों पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं सब कुछ नियंत्रण में होने के सरकारी दावों के विपरित प्रदेश की जनता आज भी अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन पाने के लिये मशक्कत कर रही है। अस्पतालों के बाहर लोग दम तोड़ रहे हैं। जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों की कालाबाजारी हो रही है। ऐसे में डब्लूएचओ की सराहना प्रदेश सरकार के लिये उत्साहवर्धक हो सकती है मगर प्रदेश की जनता को धरातल पर राहत की आवश्यकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने यूपी सरकार के कोविड प्रबंधन की सराहना करते हुए अपनी वेबसाइट पर राज्य सरकार के कोरोना के माइक्रो मैनेजमेंट के बारे में बताया कि राज्य सरकार ने 75 जिलों के 97941 गांवों में घर-घर संपर्क कर कोरोना की जांच करने के साथ आइसोलेशन और मेडिकल किट की सुविधा उपलब्ध कराई है। निःसंदेह यह प्रदेश सरकार के लिये गर्व की बात है।
सोमवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण कम होते जाने का दावा किया था। सीएम ने कहा था कि पिछले दस दिनों में प्रदेश में कोरोना एक्टिव केसों में 85000 से अधिक संक्रमित कम हुए हैं। निःसंदेह यह आंकड़े कागजों पर पूरी तरह से मजबूत होंगे मगर धरातल की बात करें तो इन्हीं 10 दिनों में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र या मैसेज भेज कर प्रदेश में कोरोना संक्रमण से बिगड़ते हालातों के जानकारी देते हुए सचेत किया है। अनेक भाजपा नेताओं ने तो अपने क्षेत्र में मदद करने की गुहार भी सीएम योगी से लगाई है। गौरतलब है कि यूपी में कोरोना प्रबंधन की व्यवस्था के खिलाफ उठाने वालों में भाजपा के सांसद, विधायक से लेकर केंद्रीय मंत्री और प्रदेश मंत्रीमंडल के सदस्य तक शामिल हैं।
ऐसे हालात में प्रदेश सरकार को इस बारे में भी चिंतन अवश्य करना होगा कि आखिर उसके प्रयासों पर उसकी ही पार्टी के सांसद, विधायक और यहां तक कि केंद्रीय मंत्री तक सवाल क्यों उठा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक, मोहनलालगंज के विधायक कौशल किशोर, बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी, भदोही विधायक दीनानाथ भास्कर और कानपुर के सांसद सत्यदेव पचैरी ने सीएम योगी को पत्र लिखकर अपने क्षेत्रों में कोरोना संक्रमितों को उपयुक्त उपचार न मिलने, अस्पतालोें में बेड, ऑक्सीजन आदि की कमी को लेकर सवाल उठाये हैं। फिरोजाबाद के जसराना से विधायक पप्पू लोधी ने अपनी कोरोना पाॅजिटिव हुई पत्नी को 3 घंटे तक उपचार न देकर जमीन पर लिटाये रखने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था।
जब सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों, सांसदों और मंत्रियों की पीड़ा और सीएम से गुहार लगाये जाने के पत्र सार्वजनिक होकर लचर व्यवस्था को प्रदर्शित कर रहे हों। इस प्रदेश के विधायकों के परिवार जनों को उपचार नहीं मिल पा रहा हो तो आम आदमी को कितनी राहत मिल रही होगी इस हकीकत से प्रदेश की जनता रूबरू है। हालात यह हैं कि सांसद-विधायकों की सिफारिशों के बावजूद कोरोना संक्रमितों को अस्पतालों में बेड तक नहीं मिल पा रहा। अस्पताल उन्हीं मरीजों को भर्ती कर रहे हैं जिनकी हालत ज्यादा गंभीर नहीं है और उन्हीं मरीजों को काफी समय तक भर्ती किये रखते हैं। ऑक्सीजन को लेकर मारामारी मची हुई है और अब जाकर व्यवस्था बनाने की दिशा में कार्य शुरू किया गया है। श्मशानों में अब भी अंतिम संस्कार करने के लिये घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सर्दी, बुखार से ग्रामीण इलाकों में स्थिति भयावह हो चुुकी है। ऐसे में डब्लूएचओ की तारीफ बेमानी है। जरूरी है कि धरातल पर लोगों को राहत दिलाने का प्रयास किया जाये। क्योंकि प्रदेश की जनता की सराहना ही सरकार के किये कार्यो का सही आंकलन कर सकती है। और अभी तक तो सरकार पासिंग मार्क्स तक हासिल करने में नाकाम दिख रही है।

