सावधान: कोरोना मरीजों को लंबा अस्पताली इलाज दे रहा है ब्लैक फंगस!

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सावधान: कोरोना मरीजों को लंबा अस्पताली इलाज दे रहा है ब्लैक फंगस!

  • रंजीता सिन्हा

लखनऊ। कोरोना से उबर रहे या जंग जीत चुके लोगों के लिए भी ब्लैक फंगस इंफेक्शन यानि म्यूकॉरमाइकॉसिस प्राणघातक हो रहा है। ज्यादातर ऑक्सीजन या वेंटीलेटर पर निर्भर रह चुके या रह रहे मरीजों पर तत्काल इसके मद्देनजर कहीं ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है, वरना मृत्यु के आंकड़े कोरोना से मरने वालों की संख्या में इजाफा बनेंगे। हालांकि ब्लैक फंगस और कोरोना दो अलग-अलग बीमारियां हैं- इसके कारण, इलाज और लक्षण भी अलग हैं, लेकिन कोरोना से गृसित मरीजों जिनकी इम्युनिटी पहले से ही कमजोर है, के प्रति जरा सी लापरवाही जानलेवा बन सकती है। एक हकीकत यह भी है कि अस्पताल में इलाज कराने की नौबत आने पर म्यूकॉरमाइकॉसिस होने की आशंका बढ़ रही है। चूंकि कोरोना मरीजों के अस्पताली इलाज के दौरान ही यह बीमारी हावी हो रही है इसीलिए इसको लेकर अब चर्चा और मंथन जोरों पर है।

गौर हो कि, कोरोना के साथ इस ताजा चुनौती से केन्द्र सरकार भी हलकान है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि अनियंत्रित डाइबिटीज और आईसीयू में ज्यादा दिन बिताने वाले कोविड के मरीजों में ब्लैक फंगस से होने वाली बीमारी म्यूकॉरमाइकॉसिस का अगर सही समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह घातक हो सकती है। इस बीमारी में आंख, गाल और नाक के नीचे काला पड़ जाता है। सबूत के आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने इसके इलाज और प्रबंधन के बावत जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि म्यूकॉरमाइकॉसिस हवा से सांस खींचने पर हो सकती है। इसमें ब्लैक
फंगस अंदर आ जाते हैं जो लंग्स को भी संक्रमित कर सकता हैं।

ऑक्सीजन वाले मरीजों में देखा जा रहा ब्लैक फंगस: डीजी हेल्थ

असल में सांस न ले पाने की तकलीफ झेल रहे कोरोना मरीजो में ऑक्सीजन का माध्यम भी ब्लैक फंगस यानि म्यूकॉरमाइकॉसिस बीमारी का कारण बन रहा है। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वस्थ्य महानिदेशक डॉ. डी. एस. नेगी के मुताबिक, जो डॉयबिटीज या कैंसर के मरीज हैं या ज्यादा दिनों तक वेंटीलेटर और ऑक्सीजन पर रह चुके हैं, उनमें इस ब्लैक फंगस बीमारी होने की आशंका ज्यादा है। बहुत तेजी से यह फैलता है। डॉ. नेगी बताते हैं कि चेहरे पर नाक या आंखों के आसपास काले चकत्ते जैसे दिखना इस बीमारी का संकेत हो सकता है। महानिदेशक स्वास्थ्य का कहना है यह फंगस आंख के रास्ते सीधे ब्रेन में पहुंच सकती है इसलिए समय रहते इसका इलाज हो जाना चाहिये। इसके पीछे कारण वो पानी भी हो सकता है जिसका इस्तेमाल ऑक्सीजन सिलेंडर के रेग्युलेटर में किया जा रहा है।

अस्पताल संक्रमण के मद्देनजर सुरक्षित नहीं: डॉ. प्रधान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल के सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण प्रधान बताते हैं कि कोरोना से संक्रमित मरीज या कोरोना से स्वस्थ्य हुए कई मरीजों में ब्लैक फंगस के लक्षण देखें गये हैं। आमतौर पर उन लोगों में होता है जिनका शरीर किसी बीमारी से लडऩे में कमजोर होता है। वह आदमी अक्सर दवाई लेता है और उसमें कई तरह की स्वास्थ्य संबधी समस्या हो जाती है। इस बीमारी में आंख और नाक के नीचे कालापन पड़ता है। दर्द होना, बुखार आना, खांसी होना, सिर दर्द होना, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टी, मानसिक स्वास्थ्य पर असर, देखने में दिक्कत, दांतों में भी दर्द, छाती में दर्द इत्यादि इस बीमारी के लक्षण हैं। डॉ. प्रधान की सलाह है कि कोरोना के मरीजों को भी जहां तक हो सके घर पर रह कर ही इलाज कराना चाहिये। मौजूदा आपाधापी में अस्पताल संक्रमण के मद्देनजर सुरक्षित नहीं कहे जा सकते। सावधानी पूरी बरतनी होगी तभी मरीजों का सही इलाज हो सकता है।

स्टेरॉयड का सेवन भी ब्लैक फंगस की वजह: पूर्व सीएमओ

राजधानी के पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके शुक्ला बताते हैं कि, जो मरीज अनियंत्रित डाइबिटीज के शिकार हैं या जिसका शरीर बीमारी से लडऩे में उतना कारगर नहीं है जितना होना चाहिए, ऐसे मरीजों में ब्लैक फंगस इंफेक्शन होने का जोखिम है। ऐसे मरीज जो किसी कारणवश लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं, उसमें भी ब्लैक फंगस का जोखिम है। इस बीमारी से बचने के लिए डाइबिटीज के मरीजों को विशेष ख्याल रखना चाहिए। कोविड-19 से डिस्चार्ज होने के बाद लगातार चेकअप करना चाहिए। स्टेरॉयड का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर उचित समय ही करे। ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान क्लीन स्ट्राइल वाटर का ही इस्तेमाल करें।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
लक्षण दिखने के अगर शुरुआती दौर में एंटीफंगल थेरेपी शुरू कर दी जाए तो मरीज की जान बच सकती है। डॉक्टर की सलाह से तुरंत एंटीबायोटिक औऱ एंटीफंगल दवाइयां लेनी जरूरी हैं। इस बीमारी को उचित देखरेख से दूर किया जा सकता है। डाइबिटीज का नियंत्रण इस बीमारी से बचने का सबसे बेहतर उपाय है। लक्षण दिखने के बाद तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कुछ को सर्जरी भी करानी पड़ सकती है।

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