तौक़ीर सिद्दीक़ी
महाराष्ट्र में की 288 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में मतदान की तारीख का एलान हो चूका है, मतदान 20 नवम्बर को होना है यानि सिर्फ एक महीना बचा है लेकिन महायुति सरकार को उखाड़ फेंकने का दावा करने वाले गठबंधन महाविकास अघाड़ी में अभी तक सीटों पर सहमति नहीं बनी है. जानकारी के मुताबिक शिवसेना यूबीटी और एनसीपी शरद पवार के बीच कोई समस्या नहीं लेकिन शिवसेना और यूबीटी और कांग्रेस के बीच कुछ सीटों के लिए रस्साकशी चल रही है, सीटों पर सहमति में हो रही देरी पर उद्धव गुट के संजय राउत काफी नाराज़ चल रहे हैं और अब उन्होंने कांग्रेस के राज्य नेताओं की जगह सीधे दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गाँधी से बात करने की बात कही है.
दरअसल संजय राउत का कहना है कि महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता मामले को उलझाए हुए हैं, वो एक एक सीट को लेकर दिल्ली से सलाह मशविरा कर रहे हैं जिसकी वजह से सीटों के तालमेल में देरी हो रही है. बता दें कि महाराष्ट्र में सीट शेयरिंग के मामले पर एक कमिटी का गठन किया गया था जिसमें शिवसेना यूबीटी की तरफ संजय राउत, एनसीपी शरद चंद्र पवार की तरफ से जयंत पाटिल और कांग्रेस की तरफ से नाना पटोले का नाम था. कहा जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी और एनसीपी एसपी के बाच मामला सुलझ गया है लेकिन नाना पटोले मामले को उलझाए हुए हैं.
वहीँ नाना पटोले का कहना है कि उनके नेता मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गाँधी हैं इसलिए उन्हें सभी मामलों की जानकारी देना ज़रूरी है. बता दें कि कांग्रेस आलाकमान की तरफ से निर्देश दिए गए थे कि सीट शेयरिंग को लेकर राज्य के नेता बयान बाज़ी न करें खासकर उन सीटों पर जो गठबंधन के बीच फांसी हुई हैं, नाना पटोले उसी निर्देश पर अमल कर रहे हैं. शिवसेना यूबीटी दबाव की राजनीती कर ज़्यादा सीटें हथियाना चाहती है. दोनों दलों के बीच पेंच मुंबई की 36 सीटों को लेकर है जहाँ पर उद्धव ठाकरे की पार्टी ज़्यादा से ज़्यादा सीटें चाहती है वहीँ कांग्रेस पार्टी भी इतनी ही सीटें चाहती है, इसके अलावा शिवसेना यूबीटी अमरावती और नागपुर में कुछ सीटें कांग्रेस से मांग रही है. दरअसल शिवसेना यूबीटी राज्य में ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है ताकि मुख्यमंत्री के लिए उसकी दावेदारी पक्की रहे वहीँ लोकसभा चुनावों में दोनों सहयोगी पार्टियों से अच्छा प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस पार्टी भी शिवसेना यूबीटी की तरह बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहती है.
इस बीच अखिलेश यादव के बयानों के बाद कांग्रेस को लग रहा है कि उसे कुछ सीटें सपा के लिए छोड़नी पड़ेंगी, सपा मुंबई की कम से कम 6 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है हालाँकि उसकी मांग 12 सीटों की है. महाराष्ट्र में पार्टी का चुनावी बिगुल फूंकने के लिए सपा प्रमुख का आज मुंबई का चुनावी कार्यक्रम है. अखिलेश ने साफ़ कर दिया है कि हरियाणा की तरह वो कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र चुनाव से हटने वाले नहीं, अच्छी बात ये है कि सपा उन सीटों पर ध्यान केंद्रित किये हुए जो ओवैसी की पार्टी AIMIM का गढ़ बताई जा रही है, पिछले चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने दो सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया था, महाराष्ट्र विधान सभा में सपा के दो विधायक हैं. ऐसे में कांग्रेस अगर शिवसेना यूबीटी को मुंबई में 20 सीटें दे देगी तो वो समाजवादी को कैसे एडजस्ट करेगी। इसलिए मुंबई की सीटों पर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की पार्टी के बीच पेंच फंसा हुआ है जो समय रहते न सुलझा तो एक और राज्य में इंडिया गठबंधन को झटका लग सकता है.
उधर सत्ताधारी गठबंधन महायुति में सीटों पर फंसा पेंच सुलझ गया है और उसने प्रत्याशियों को फाइनल करने का काम भी शुरू कर दिया है. महायुति एकबार फिर सरकार बनाने के लिए बेताब है, उसे साबित करना है कि शिवसेना और एनसीपी को तोड़कर बनी सरकार को महाराष्ट्र की जनता का समर्थन प्राप्त है. एकनाथ शिंदे को साबित करना है कि शिवसेना को तोड़ने का फैसला सही था वहीँ अजीत पवार को भी अपने फैसले को सही साबित करना है. ऐसे में महाविकास अघाड़ी में सबसे ज़्यादा परेशान उद्धव ठाकरे की पार्टी है, उसे भी साबित करना है कि भले ही उससे पार्टी का नाम और निशान चीन लिया गया लेकिन असली शिवसेना वही है, इसलिए संजय राउत की बेचैनी को समझा जा सकता है. कांग्रेस पार्टी हरियाणा की गलतियों से सबक सीखकर फूंक फूंककर कदम उठा रही है और इसलिए वो कोई भी कदम जल्दबाज़ी में नहीं उठाना चाहती।

