उद्धव के सामान में क्या ढूंढ रहा चुनाव आयोग?

आर्टिकल/इंटरव्यूउद्धव के सामान में क्या ढूंढ रहा चुनाव आयोग?

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अमित बिश्नोई
महाराष्ट्र में चुनावी सरगर्मियां इस वक़्त अपने उफान पर हैं इसलिए पार्टियां कब कहाँ, किस घटना को चुनावी मुद्दा बना दें, कहा नहीं जा सकता। आम तौर चुनाव आयोग की टीमें इलेक्शन के दौरान अक्सर पार्टियों के बड़े नेताओं के हेलीकाप्टर, गाड़ियों के काफिले या घरों पर रेड मारकर तलाशी अभियान अंजाम देती हैं, ये अलग बात है कि चुनाव आयोग के अधिकारीयों की इस तलाशी अभियान का शिकार विपक्षी पार्टियों के बड़े नेता ही होते हैं, और हर बार जब भी ऐसा होता है एक बात कही जाती है कि प्रधानमंत्री या गृहमंत्री जैसे टॉप लीडरों के हेलीकाप्टर या काफिलों की जांच चुनाव आयोग के अधिकारी क्यों नहीं करते और हर बार चुनाव आयोग विपक्ष के आरोप के जवाब में उस जांच वाली घटना का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि ऐसा नहीं है, इन लोगों के हेलीकॉप्टरों की जांच होती है, हालाँकि वो घटना एक बिरले घटनाक्रम में होती है जो कभी किसी चुनाव में हुई होती है. फिलहाल महाराष्ट्र में कल जब चुनाव आयोग के अधिकारीयों द्वारा उद्धव ठाकरे के बैग की तलाशी ली गयी तो सियासत में अचानक उबाल आ गया और ये उबाल इसलिए आया कि एक हफ्ते के अंदर उद्धव के हेलीकाप्टर की दो बार जांच की गयी जिससे किसी भी बड़े नेता का भड़कना लाज़मी है और ये आरोप लगाना भी लाज़मी है कि चुनाव आयोग के तथाकथित ये कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी प्रधामंत्री मोदी या गृह मंत्री अमित शाह के सामान की तलाशी क्यों नहीं लेते, और क्या उनमें ऐसा करने की हिम्मत है।

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे जैसे नेता के सामान की एक हफ्ते में दो बार तलाशी के बाद तो यही माना जायेगा कि या तो चुनाव आयोग को कोई लीड मिली है या फिर कोई फीडबैक क्योंकि एक हफ्ते में बिना किसी ख़ास वजह के दो बार तो तलाशी नहीं ली जा सकती। उद्धव ठाकरे ने इसीलिए इसे भाजपा के इशारे पर की गयी कार्रवाई बताया, उनके मुताबिक ये सिर्फ परेशान करने और उत्पीड़न करने के लिए किसी के इशारे पर की गयी कार्रवाई है, ज़ाहिर सी बात है उद्धव का इशारा चुनाव पर नहीं बल्कि मोदी और शाह पर ही है क्योंकि उद्धव खुले तौर पर इस बात को कहते हैं कि चुनाव आयोग केंद्र के इशारे पर ही कार्रवाई करता है. एक हफ्ते में दो बार हुई इस तलाशी अभियान से उद्धव ठाकरे कल काफी नाराज़ हुए, हालाँकि नाराज़गी में भी उन्होंने अपना आपा नहीं खोया और जांच में कोई बाधा नहीं पहुंचाई, हाँ ये सवाल ज़रूर चुनाव अधिकारीयों से पूछा कि क्या उन्होंने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह या फिर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और दोनों उपमुख्यमंत्रियों फडणवीस और अजीत पवार के सामान की जांच की या उनकी कोई इस तरह की तैयारी है। उद्धव ने अधिकारीयों को इस बात की सलाह भी दी कि अगर वो लोग प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, महाराष्ट्र के मुखयमंत्री और उनके दोनों असिस्टेंट्स की इस तरह तलाशी लें तो उसकी वीडियो सोशल मीडिया पर ज़रूर डालें। उद्धव ने एक तरह से चुनाव की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठा दिया।

वैसे चुनाव आयोग को भेदभाव और गैर निष्पक्षता जैसे आरोपों की आदत हो चुकी है और वो इन्हें अब सीरियसली नहीं लेता। उसके पास इन आरोपों पर कुछ सेट जवाब तैयार रखे हैं जो ऐसे मौकों पर वो उन्हें सामने रखता है, इस बार भी जैसे उद्धव ने इसे मुद्दा बनाया चुनाव आयोग का पहले से तय जवाब सामने आया कि अमित शाह के भी हेलीकाप्टर की जांच हुई थी. लेकिन ये नहीं बताया कि कब और किस चुनाव में हुई थी और न ही इस बात का जवाब दे पाया कि एक ही हफ्ते में दो बार उसके अधिकारीयों ने उद्धव के सामान की जांच क्यों की. क्या उन्हें इन दोनों तलाशियों में कुछ मिला, ज़ाहिर सी बात है कि कुछ नहीं मिला होगा वरना उद्धव अबतक घेरे में खड़े होते। भाजपा चढ़कर बोल रही होती और चुनाव आयोग पता नहीं क्या कर रहा होता।

उद्धव पर चुनाव आयोग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद और कुछ न मिलने के बाद शिवसेना को चुनाव आयोग और भाजपा पर चढ़ने का मौका मिल गया. संजय राउत एक आक्रामक योद्धा की तरह निकलकर सामने आ गए और सीधे तौर पर ये आरोप लगा दिया कि भाजपा और शिंदे के उम्मीदवारों को पहले ही पैसे पहुंचाए जा चुके हैं और जब ये सब हो रहा था तब आयोग के ये पर्यवेक्षक आँखों पर पट्टी बांधे हुए थे। लोकसभा चुनाव में भी उन्हें सबूत दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मुद्दे पर शरद पवार भी मैदान में उतर पड़े और कहा कि सत्ता में बैठे लोगों ने ये तय कर लिया है कि सत्ता का दुरूपयोग कैसे करना है। पवार ये भी कहते हैं कि इसमें अब हैरानी की कोई बात नहीं, हमें इसी के साथ अपनी लड़ाई को आगे ले जाना है क्योंकि ये सब चुनाव का हिस्सा बन चूका है. आयोग को सिर्फ विपक्ष दिखाई देता है, सत्ता पक्ष तो कभी गलत कर ही नहीं सकता. इस मुद्दे पर सिर्फ MVA ही नहीं इंडिया ब्लॉक् की अन्य पार्टियों ने भी चुनाव आयोग की इस एकतरफा जांच पर सवाल उठाया है. वहीँ चुनाव आयोग कहा रहा कि उसे महाराष्ट्र चुनाव में अबतक पांच सौ करोड़ चेकिंग के दौरान मिल चुके हैं इसलिए वो ज़्यादा सतर्कता बरत रहा है लेकिन सवाल फिर वही उठता है कि एक हफ्ते में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री के सामान की तलाशी क्यों? चुनाव आयोग के पास इस सवाल का जवाब नहीं है, वो नहीं बता पा रहा है कि उद्धव के सामान से वो ऐसा क्या तलाशना चाहता है कि उसे बार बार तलाशी लेनी पड़ रही है.

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