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e Rupee Digital Currency: ई-रुपी क्या है, कैसे करें इसका उपयोग, ई-रुपी UPI से कितना है अलग

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eRupee Digital Currency: भारत की आधिकारिक डिजिटल करेंसी ‘ई रुपी’ जिसे इंडिया का बिटकॉइन कह सकते हैं, इसके बारे में अभी तक सुना होगा। लेकिन ई-रुपी क्या है? इसे कैसे उपयोग करते हैं? इसके फायदे और नुकसान क्या हैं? ई-रुपी, यूपीआई और वॉलेट से कैसे अलग है? बिटकॉइन और ई-रुपी में क्या अंतर है? ई-रुपी में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा प्रचलन से बाहर हो चुके 2,000 रुपए के नोट स्वीकार किए जाते हैं? ई-रुपी में छुट्टे पैसे, कैसे मिलते हैं? E-Rupee के जरिए आरबीआई हर ट्राजैक्शन को ट्रैक कर पाएगा?
ई-रुपी क्या है?

ई-रुपी, डिजिटल रुपी, और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) तीनों एक

इसे समझने के लिए यह समझए कि ई-रुपी, डिजिटल रुपी, और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) तीनों एक है, इसमें कन्फ्यूज नहीं होना है। पर्स में रखा जो 500, या 200 का नोट है जिसे आरबीआई छापती है उसी तरह ई-रुपी सॉवरेंन बैंक करेंसी है। इसका मतलब रुपी को आरबीआई इश्यू करता है। E-Rupee आरबीआई के balance sheet Liabilities के रूप में दिखाई देती है।

जिस तरह से किसी दुकान में 100, 200 या 500 रुपए नोट से खरीदारी करते हैं। उसी तरह इस ई-रुपी से किसी को सामान के बदले पेमेंट कर सकते हैं। इस देश के सारे नागरिक और सरकार वैल्यू को स्टोर कर के रख सकते हैं। वैल्यू स्टोर करने से मतलब है कि अपनी सैलरी चाहें तो ई-रुपी में ले सकते हैं। जिस तरह से पास में रखा नोट लीगल टेंडर यानी वैध मुद्रा है उसी तरह ई-रुपी है।

ई-रुपी से कर सकते हैं एफडी

अगर बैंक, या कोई दुकानदार ई-रुपी के बदले कैश या फिर बैंक से ई-रुपी के बदले फिक्स्ड डिपॉजिट की मांग रखते हैं तो ऐसा बिल्कुल कर सकते हैं। कैश की तरह ई-रुपी को एक्सचेंज कर सकते हैं। बता दें कि अगर ऐसा लग रहा है कि ई-रुपी सिर्फ उसी को दें पाएंगे जिसके पास बैंक अकाउंट है तो ऐसा नहीं है। जैसे किसी को कैश दे सकते हैं वैसे किसी को ई-रुपी दे सकते हैं उसके लिए बैंक अकाउंट जरूरी नहीं है।

ई-रुपी लाने का मकसद?

ई-रुपी लाने का मकसद केंद्र सरकार नोट के प्रिंटिंग में आने वाली लागत और उसमें होने वाले वेरिफिकेशन खर्च कम करना चाहती है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 21 में मनी प्रिंटिंग और सेक्यौरिटी कॉस्ट 4,012 करोड़ रुपए था जो वित्त वर्ष 22 में बढ़कर 4,984 करोड़ रुपए हो गया।

ई-रुपी और बिटकॉइन में अंतर?

बिटकॉइन एक डीसेंट्रलाइज करेंसी है जो पब्लिक ब्लॉकचेन का उपयोग करती है। जबकि ई-रुपी सेंट्रलाइज करेंसी है जो प्राइवेट ब्लॉकचेन का उपयोग करती है। बिटकॉइन कोई संस्था या सरकार कंट्रोल नहीं करती। जबकि ई-रुपी को आरबीआई कंट्रोल करता है। भारत में क्रिप्टोकरेंसी जैसे इथोरियम और बिटकॉइन लीगल टेंडर नहीं है लेकिन ई-रुपी देश में लीगल टेंडर है।

कैसा दिखता है ई-रुपी?

बता दें कि ई-रुपी को फिजिकल करेंसी नहीं है, लेकिन आरबीआई ने जनता को बताने के लिए ई-रुपी का फोटे जारी किए हैं। ई-रुपी में 50 पैसे, 1 रुपए का सिक्का मिल जाएगा। इसके अलावा 2, 5, 10, 20, 50, 100, 200, 500, और 2000 रुपए के नोट मौजूद हैं। जिस तरह से रेगुलर नोट पर आरबीआई लोगो (Logo) और गवर्नर का साइन है, ठीक उसी तरह ई-रुपी में लोगो और गवर्नर का साइन है। हालांकि 2000 रुपए के नोट चलन से बंद होने के बाद से ई-रुपी में 2,000 रुपए का नोट इस्तेमाल नहीं कर पाएंगें। ई-रुपी को टोकन कहते हैं। 500 रुपए के नोट को ‘नोट’ कहते हैं वैसे ही ई-रुपी में 500 रुपये को नोट नहीं बल्कि ‘टोकन’ कहा जाता है।

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