प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर लाल किले की प्राचीर से लगभग डेढ़ घंटे का लम्बा भाषण दिया गया. देश को सम्बोधन में इस बार की ख़ास बात यह रहीं कि उन्होंने कोई वादा नहीं किया जैसा कि वह हर साल किया करते हैं, 2021 में उन्होंने बहुत से वादे किये थे कि 2022 तक उनकी सरकार क्या क्या करने वाली है. शायद वह वादे पूरे नहीं हुए या फिर अधूरे रहे इसलिए किसी नए वादे से इस बार उन्होंने परहेज़ किया। अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने बहुत सी बातें कहीं। इतिहास का भी अपने अंदाज़ में कांग्रेस को भुलाते हुए ज़िक्र किया वहीँ अगले 25 साल की तैयारियों की बात कही. प्रधानमंत्री के इस भाषण को लोग अब अपनी – अपनी तरह पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, उनके इस भाषण में आपको जहाँ भविष्य का रोड मैप नज़र आएगा वहीँ उस रोड मैप में छुपी हुई धमकी भी नज़र आएगी। उनके आज के भाषण में साफ़ नज़र आएगा कि आने वाले साल भी विपक्षी पार्टियों के लिए बुरे ही साबित होने वाले हैं.
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मोदी जी के आज के भाषण में जब हम उनकी आत्म निर्भरता की बातों पर गौर करते हैं तो हमें लगता है कि आम जनता को अभी और कष्ट उठाने होंगे। प्रधानमंत्री जब कहते हैं कि हमें अब दूसरे पर निर्भर नहीं रहना, वह जब वैकल्पिक ऊर्जा की बात करते हैं, वो जब बिजली बचाने की बात करते हैं, वो जब विदेशी वस्तुओं से दूर रहने की बात करते हैं, वो जब तेल के लिए आत्म निर्भरता की बात करते हैं, वह जब यह कहते हैं कि हमें सब कुछ खुद पैदा करना है तो कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि क्या हम दुनिया से व्यापार खत्म करना चाह रहे हैं, या फिर उन्हें यह लगने लगा है कि भारत में दुनिया से निवेश आना बंद हो गया है या फिर कम हो गया है, क्या हमारा विदेशी मुद्रा भण्डार इतना कम हो गया है कि हमें विदेश से इम्पोर्ट को घटाना और स्वदेशी को अपनाना मजबूरी बन गयी है. वरना क्या कारण है कि प्रधानमंत्री को लोगों से यह कहना पड़ा कि अपना आंकलन खुद करो, किसी और से सर्टिफिकेट लेने की ज़रुरत नहीं। इसके बावजूद भी प्रधानमंत्री ने अपने पूरे भाषण में लगभग 60 बार किसी न किसी बहाने दुनिया का ज़िक्र किया। वैसे यह मोदी जी का कमाल ही है कि उनकी विरोधाभासी बातों को लोग पकड़ नहीं पाते, या फिर हो सकता है जानबूझकर इग्नोर कर देते हों.
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पांच प्रण की बात कही. इस प्रण में एक है कि अपने अंदर से ग़ुलामी के अंश को ख़त्म करना। देश की आज़ादी को आज 75 वर्ष पूरे हो गए, इस मौके पर ग़ुलामी की बात क्यों? क्या वाकई हम में अब भी गुलामी के अंश बाक़ी हैं, वह किस तरह की गुलामी की बात करना चाह रहे हैं , उनकी इस बात को लेकर काफी भ्रम की स्थिति है, यकीनन इसपर सियासत होगी, राजनीतिक पार्टियों के बीच ग़ुलामी के अंश की यह बात मुद्दा ज़रूर बनेगी। इन्ही पांच प्रण में उन्होंने नागरिकों को अपने कर्तव्य का बोध कराया। इस पांचवें प्रण से यह बात स्पष्ट मालूम पड़ती है कि आने वाले दिनों में कर्तव्यों को लेकर नागरिकों पर और सख्ती हो सकती है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने पहले प्रण के रूप बड़े संकल्प लेने की बात कही और कहा कि देश अब सिर्फ बड़े संकल्पों के साथ आगे बढ़ेगा। अब यह बड़े संकल्प क्या होंगे यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।
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प्रधानमंत्री मोदी का भाषण हो और परिवारवाद की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। आज भी देश के नाम सम्बोधन में अगले 25 वर्षों का रोड मैप पेश करते करते भाषण का समापन परिवारवाद की बात कर राजनीतिक रंग में की. हालाँकि उन्होंने इस बात को भी कहा कि उनके परिवारवाद की बात को अक्सर लोग राजनीति से जोड़ देते हैं लेकिन यह सभी को मालूम है कि उनके परिवारवाद की बात कहाँ से शुरू होती है और कहाँ पर ख़त्म। प्रधानमंत्री की इस बात पर कांग्रेस पार्टी की ओर से एक संतुलित टिप्पणी भी सामने आयी, कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री भाजपा की आंतरिक समस्या की बात कर रहे थे. इस पूरे भाषण में प्रधानमंत्री ने एक बात जो सबसे अच्छी कही वह थी नारी सम्मान की, उनकी इस बात को लोग नॉएडा की घटना से जोड़कर देख रहे हैं. बहरहाल प्रधानमंत्री के आज के भाषण पर अभी आगे काफी चर्चा होगी, अभी तो यही कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी का आज का भाषण कैसा था यह आपकी सोच पर निर्भर करता है कि आप उसमें क्या तलाश रहे हैं.

