2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर आज दबथुआ में महारैली
रालोद और सपा सुप्रीमो करेंगे बड़ी घोषणाएं
अमित बिश्नोई
मेरठ। उत्तर प्रदेश में होने वाले 2022 के विधान सभा चुनावों के लेकर 7 दिसम्बर का दिन राजनैतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है। मेरठ के दबथुआ में चुनावों के मद्देनजर रालोद और सपा सुप्रीमो एक ही मंच से गठबंधन की तस्वीर साफ कर सकते हैं। हालांकि गठबंधन से ज्यादा उत्सुकता रालोद सुप्रीम चौधरी जयंत सिंह और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच हुए सीटों के बंटवारे को लेकर बनी हुई है।
सिवालख़ास पर अटक रही सांसे
7 दिसंबर को होने जा रहे हैं गठबंधन पर इस बार पूरे वेस्ट यूपी की निगाहें टिकी हुई है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इसे काफी महत्वपूर्ण गठबंधन माना जा रहा है। जाट, यादव और मुस्लिम समीकरणों को जोड़ कर बनाए गए इस गठबंधन में सबसे अहम घोषणा सिवालखास सीट की मानी जा रही है। माना जा रहा है कि दोनों ही पार्टी इस सीट पर अपना-अपना मजबूत दावा ठोंक रही थी। हालांकि समुद्र मंथन के बाद यह सीट किस के पाले में आई है अभी तक साफ नहीं हो पाया है। दोनों ही पार्टी के पदाधिकारी इस सीट को लेकर उत्साहित है।
जाटों व किसानों का समीकरण, लिखेगा इतिहास
कृषि बिल वापस लेने के लिए आंदोलन पर बैठे किसानों की सुध भले ही डेढ़ साल से किसी ने ना ली हो, लेकिन चुनाव आते ही सबके मेनिफेस्टो में किसानों का एजेंडा सबसे ऊपर हो गया है। सरकार ने अचानक ही कृषि कानून वापस ले लिए। वही किसानों से संबंधित पराली ना जलाने के कानून के साथ ही किसानों पर होने वाले मुकदमे भी मौजूदा सत्ताधारी पार्टी ने वापस ले लिए। अन्य दूसरी राजनैतिक पार्टियों के मुख्य मुद्दों में किसानों का मुद्दा सबसे ऊपर रखा गया है। किसान आंदोलन ने वेस्ट यूपी में चौधरी जयंत सिंह को भी मजबूत किया है। ऐसे में इस गठबंधन पर पूरे वेस्ट यूपी की निगाहें टिकी हुई है। जाट और किसानों को इन चुनावों में गेमचेंजर की तरह देखा जा रहा है। हालांकि बदली फिजाओं का रुख किस और होगा यह देखना अभी बाकी है।

