भाजपा शासित उत्तराखण्ड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने आज विधानसभा में विवादस्पद UCC बिल पेश कर दिया। बिल पेश होने के बाद आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वो समान नागरिक संहिता को कभी नहीं मानेंगे। बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने UCC की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या किसी समुदाय को छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि हर कानून में एकरूपता नहीं लाई जा सकती और अगर आप किसी समुदाय को इस यूसीसी से छूट देते हैं तो फिर इसे समान नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है?
लखनऊ ईदगाह के पेश इमाम और AIMPLB के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि ऐसे किसी यूनिफार्म सिविल कोड की कोई जरूरत नहीं थी. AIMPLB की कानूनी टीम उत्तराखंड विधानसभा में पेश इस बिल के मसौदे का अध्ययन करेगी, इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस विवादित का कांग्रेस ने भी विरोध किया है. कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने आरोप लगाया कि यूसीसी लागू करने का कदम ध्रुवीकरण का प्रयास है। इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और संबंधित मामलों से संबंधित कानून शामिल हैं।
पुष्कर सिंह धामी ने आज कड़ी सुरक्षा में और विपक्ष के हंगामे के बीच विधानसभा में यूसीसी बिल पेश किया और फ़ौरन सदन को स्थगित भी कर दिया गया। इससे पहले विधानसभा और आसपास के क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गयी थी ताकि किसी भी तरह का कोई विरोध प्रदर्शन न हो सके. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भाजपा सरकार के इस कदम को एक चुनावी स्टंट बताया है , रावत ने कहा कि राज्यों द्वारा UCC कानून लाने का कोई मतलब ही नहीं, इसे लाना है तो केंद्र सरकार को लाना चाहिए लेकिन प्रधानमंत्री मोदी राज्यों की आड़ लेकर ध्रूवीकरण का खेल खेल रहे हैं.

