अमित बिश्नोई
ओलम्पियन विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया कल फाइनली कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और अपने जीवन की नयी पारी का आगाज़ कर दिया। पार्टी और राजनीति में औपचारिक रूप से शामिल होते ही दोनों पहलवानों को बड़ी ज़िम्मेदारियाँ सौंप दी गयीं। विनेश फोगाट को जहाँ उनकी ससुराल जुलाना से उम्मीदवार घोषित किया गया वहीँ बजरंग पुनिया को अखिल भारतीय किसान मंच के कार्यकारी अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी सौंप दी गयी. ये सबकुछ पहले से लिखी हुई एक सधी हुई पटकथा के मुताबिक हुआ जिसकी जानकारी पहले से लोगों को थी, बस उसकी पुष्टि होनी बाकी थी. दोनों ही पहलवानों ने कल राजनीती में प्रवेश करते हुए देश को और कांग्रेस को भरोसा दिलाया कि वो जिस लगन और मेहनत से कुश्ती के क्षेत्र में मेहनत करते थे वैसी ही मेहनत वो अब राजनीति के अखाड़े में भी करेंगे और पूरी कोशिश करेंगे कि महिलाओं पर शोषण के खिलाफ उन लोगों ने जंतर मंतर से जो संघर्ष शुरू किया था उस संघर्ष को वो लगातार आगे बढ़ाएंगे और बेटियों पर अन्याय करने वालों को सबक सिखाएंगे। खैर ये सब औपचारिक बातें हैं जो हर कोई किसी पार्टी की जोइनिंग पर करता है लेकिन इतना तो ज़रूर है कि विनेश फोगट की चुनावी राजनीती में इंट्री से हरियाणा का चुनाव अब काफी दिलचस्प हो गया है।
विनेश को कांग्रेस पार्टी ने उस सीट से मैदान में उतारा है जहाँ पर उसे 2005 के बाद कभी कामयाबी नहीं मिली है. विनेश को उनकी ससुराल जुलाना से मैदान में उतारा गया है, पहले कहा जा रहा था कि उन्हें उनके मायके यानि दादरी से चुनाव लड़ाया जाएगा जो जुलाना की तुलना में ज़्यादा सुरक्षित सीट है और जहाँ कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन भी जुलाना की अपेक्षा काफी बेहतर है लेकिन विनेश फोगाट को उनकी जनस्थली की जगह उनकी कर्मस्थली सौंपी गयी. कल प्रेस कांफ्रेंस में उनसे जब इस बारे में सवाल किया गया तब उन्होंने यही बात कही थी और कहा था एक उनकी जनस्थली है और एक कर्मस्थली और दोनों ही उनको बहुत प्यारे हैं. विनेश फोगाट जाट समुदाय से आती हैं और जुलाना सीट में 50 प्रतिशत आबादी जाटों की है. यही वजह है कि यहाँ पर INLD और JJP जो वहीँ से निकली पार्टी है, काफी दबदबा है. पिछले चुनाव में इस सीट से जेजेपी के अमरजीत ढांडा को सफलता मिली थी, कांग्रेस यहाँ पर तीसरे नंबर रही थी. इसका वोट प्रतिशत भी मात्र 10% रहा था. कह सकते हैं कि पिछले चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हालत यहाँ काफी पतली थी यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी विनेश फोगाट को यहाँ से उतारकर अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाना चाह रही है. कांग्रेस पार्टी को मालूम है कि इस बार हालात बदले हुए हैं, विनेश फोगाट इस समय लोगों की चर्चाओं के केंद्र में हैं, दिल्ली में महिला पहलवानों का यौन शोषण के खिलाफ आंदोलन हो या फिर पेरिस ओलम्पिक में उनसे पदक छीने जाने का मामला हो, विनेश इस समय लोकप्रियता और सहानुभूति की लहर पर सवार हैं, ऐसे में कांग्रेस पार्टी को लग रहा है कि यहाँ पर वापसी का उसके पास सबसे बढ़िया मौका है, विनेश फोगाट जुलाना में कांग्रेस की वापसी करा सकती हैं.
विनेश फोगाट ने हाल ही में खुलासा किया था कि राजनीति में शामिल होने का उनपर हमेशा दबाव रहता था। विनेश ने 27 अगस्त को जींद में खाप पंचायतों से मुलाकात की और कहा कि उन पर राजनीति में शामिल होने का दबाव है लेकिन मैं अपने बड़ों से सलाह लेने के बाद फैसला करूंगी। किसानों की पूरी सहानुभूति बटोरने का ये विनेश का प्रयास था और ये पहला स्पष्ट संकेत था कि वो राजनीति के दंगल में उतरने का मन बना चुकी हैं. कांग्रेस पार्टी भी हरियाणा और देश का मूड भांप चुकी थी और शायद यही वजह रही होगी कि पेरिस से भारत की धरती पर कदम रखते है कांग्रेस पार्टी ने विनेश को कभी अकेला नहीं छोड़ा। ओलम्पिक में फोगट की जीत पर सबसे पहली बधाई कांग्रेस पार्टी की तरफ से आयी। इससे पहले पहलवानों के विरोध के दौरान भी गांधी परिवार विनेश फोगट के पीछे खड़ा था। प्रियंका गांधी वाड्रा भी उनके साथ धरने पर बैठीं। महिला पहलवानों के खिलाफ यौन शोषण का मुद्दा लोकसभा चुनावों के दौरान भी गूंजा और अब हरियाणा विधानसभा चुनावों में एक प्रमुख मुद्दे के रूप में वापस आ गया है। कांग्रेस को पूरी उम्मीद है बजरंग पुनिया के कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ने और विनेश फोगट के चुनावी मैदान में उतरने से राज्य में जाट वोटों पर उसकी पकड़ और मज़बूत हो जाएगी, वो पकड़ जो उसने लोकसभा चुनाव में बनाई थी, इसके अलावा महिला वोटरों का भी एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस पार्टी के पक्ष में आ सकता है.
विनेश फोगट को शंभू बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में कई बार देखा गया। खाप पंचायतों और किसानों के साथ उनका जुड़ाव हरियाणा विधानसभा चुनावों में उनका समर्थन हासिल करने की उनकी क्षमता को भी रेखांकित करता है। विनेश के लिए राजनीति कोई अनजानी चीज़ नहीं है, उनकी पृष्ठभूमि खेती किसानी और पहलवानी के साथ राजनीतिक भी है. उनकी कज़िन बहन बबिता फोगट उनसे पहले राजनीती में पदार्पण कर चुकी हैं, अंतर ये है कि वो उनकी विरोधी पार्टी भाजपा से हैं, उन्होंने 2019 में भाजपा ज्वाइन की और दादरी सीट से चुनावी मैदान में उतरीं हालाँकि उन्हें कामयाबी हासिल नहीं हुई. फोगाट परिवार से विनेश ऐसी दूसरी ओलम्पियन हैं जिन्होंने कुश्ती के बाद राजनीति में कदम रखा है. विनेश के राजनीति में उतरने का उनके सभी साथियों और प्रशंसकों ने स्वागत किया, इस कड़ी में भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आंदोलन में विनेश के साथ बढ़चढ़कर हिस्सा लेने वाली ओलम्पिक मैडल विनर साक्षी मालिक ज़रूर निराश हैं , साक्षी का मानना है कि जो लड़ाई उन लोगों ने मिलकर शुरू की थी वो अभी अधूरी है, बेहतर होता कि ये लड़ाई अंजाम तक पहुँच जाती तब विनेश राजनीति के अखाड़े में उतरती। वहीँ विनेश के कांग्रेस पार्टी में जाते है भाजपा हमलावर हो गयी है, बृजभूषण ने भी विनेश पर पलटवार किया है और कहा है कि उनके खिलाफ दरअसल ये आंदोलन एक राजनीतिक साज़िश थी जो अब खुलकर सामने आ चुकी है. वहीँ विनेश का कहना है कि उनकी लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है बल्कि एक मज़बूत प्लेटफॉर्म मिलने से इस लड़ाई को अब मज़बूती से लड़ा जायेगा। बहरहाल विनेश को राजनीति में उतरने के लिए बधाई, ओलम्पिक में भले है वो पदक से वंचित रह गयी लेकिन उम्मीद है कि चुनावी अखाड़े में उन्हें जीत का मैडल ज़रूर मिलेगा। देखना होगा कि विनेश का ये नया सफर उनके लिए कैसा रहेगा।

