देहरादून। उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा (Fifth Legislative Assembly of Uttarakhand) का क्या स्परूप होगा। यह आगामी 10 को पता चल जाएगा। 10 मार्च को दोपहर 12 बजे तक राज्य के पांचवीं विधानसभा की पूरी स्थिति साफ हो जाएगी। वहीं चुनाव परिणाम भाजपा के लिए एक बड़े बदलाव की दिशा तय करेगा। राज्य में चुनाव होने के बाद अभी दोनों दल यानी भाजपा और कांग्रेस खुद को इस स्थिति में नहीं पा रहे हैं कि उनमें से किसी एक को स्पष्ट बहुमत मिलेगा। ऐसी स्थिति में भाजपा ने तीन स्थितियों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इसके लिए भाजपा ने संभावित निर्दलीय और संभावित क्षेत्रीय पार्टियों से भी संपर्क साधने की पूरी भूमिका बनानी शुरू कर दी है। भाजपा एक बार फिर से प्रदेश की सत्ता में वापसी की कोशिश में है। इसीलिए पार्टी चुनाव परिणाम को लेकर गहन मंथन कर रही है। भाजपा चुनाव परिणाम के तीन संभावित स्थिति को लेकर अपनी रणनीति बना रही है। जिसके अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नडडा ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डा0 रमेश पोखरियाल निशंक के साथ लंबी बातचीत की। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी दिल्ली बुला लिया गया है। इसको पार्टी की रणनीति से जोड़ा जा रहा है। गता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से 57 पर विजय प्राप्त की थी। पांच साल का कार्यकाल काफी उठापटक वाला रहा। कई मुख्यमंत्री इस दौरान बदले गए।
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लेकिन इसके बाद भी भाजपा को उम्मीद है कि वो एक बार फिर से राज्य में सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत पा लेगी। हालांकि पार्टी चुनाव परिणाम (Party election results) आशानुरूप न आने की संभावित स्थिति को लेकर भी मंथन कर रही है। जिसमें पार्टी रणनीतिकारों ने तीन स्थितियों पर मंथन शुरू किया है। पहली स्थिति आसानी से भाजपा को बहुमत, दूसरी स्थिति बहुमत का 36 का आंकड़ा पर पहुंचना। तीसरी स्थिति किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलने पर त्रिशंकु विधानसभा बनने की स्थिति में बाहरी समर्थन। मतदान के दौरान जिस तरह भाजपा के भीतर कई प्रत्याशियों ने भितरघात की आशंका जताई है उससे सभी संभावनाओं पर विचार हो रहा है। सरकार बनाने के लिए अगर समर्थन की नौबत आती है तो भाजपा सबसे पहले चुनाव जीतकर आए बागियों का स्वागत करेगी।

