कभी फाके में जीती थी वंदना, आज ओलिम्पिक में हैट्रिक जमाकर रच दिया इतिहास

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कभी फाके में जीती थी वंदना, आज ओलिम्पिक में हैट्रिक जमाकर रच दिया इतिहास

Tokyo Olympic: टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हरा कर भारत को पदक के थोड़ा और करीब पहुंचा दिया लेकिन इस जीत मे सबसे बड़ा योगदान रहा उत्तराखंड की रहने वाली वंदना कटारिया (Vandana Kataria) का जिन्होंने एक के बाद एक लगातार तीन गोल दाग कर भारतीय टीम को विजय दिलाई। इस स्तर पर ये कारनामा करने वाली वो पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी बन गयी हैं, जिसके लिए हॉकी इंडिया ने भी उन्हें बधाई दी है। इस कारनामे के बाद उत्तराखंड स्थित उनके घर पर जश्न का माहौल है, वहीं,  मेरठ में भी जश्न का माहौल है, जहां वंदना ने प्रोफेशनल हॉकी की शुरुआत की थी और यहीं से वो लखनऊ स्पोट्र्स हॉस्टल Lucknow Sports Hostel पहुंचीं।

 पिता करते थे दूध का काम  

वंदना का ताल्लुक देवभूमि हरिद्वार के रोशनाबाद से हैं, इसी छोटे से गांव में जब वो बचपन में हॉकी खेलती थी तो लोग उनका मजाक बनाते थे साथ ही उनके परिवार पर भी छींटाकशी करते थे। बता दे कि हरिद्वार भेल (BHEL) से सेवानिवृत्त होने के बाद वंदना के पिता ने दूध का काम शुरू किया था ताकि उनकी बेटी के सपने पूरे हो सके, और वो सपना कुछ और नहीं बल्कि देश के लिए हाँकी खेलना था। इसमे पिता नाहर सिंह के साथ माता सोरण देवी ने भी हमेशा वंदना का साथ दिया।

महिला हॉकी टीम का स्वर्णिम सफर जारी, क्वार्टरफाइनल में पहुंची

खेल के कारण नहीं पहुंची थीं पिता के अंतिम संस्कार में

बता दे कि वंदना के पिता अब इस दुनिया में नहीं है इसी वर्ष उनके पिता का देहांत हुआ था। लेकिन ओलंपिक की तैयारियों के चलते वो उनके अंतिम संस्कार मे भी नहीं पहुँच सकी थी, लेकिन गम कि इस घड़ी मे भी Vandana ने हौसला नहीं छोड़ा और तैयारियों में जी-जान से जुटी रहीं। अप्रैल, 15,  1992 को जन्मीं वंदना कटारिया ने पहली बार जूनियर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में 2006 में भाग लिया था जबकि 2013 आते- आते वो देश में सबसे ज्यादा गोल करने वाली महिला हाँकी खिलाड़ी बन चुकी थीं। उन्होने जर्मनी में हुए जूनियर महिला विश्वकप में भी मेडल हासिल किया था।

हैट्रिक से दी स्वर्गीय पिता को श्रद्धांजलि

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रहीं वंदना कटारिया के पिता का जब मई 2021 में निधन हुआ था, तब वो बेंगलुरु में ओलंपिक कैंप में थीं। Covid19 प्रोटोकाल और तैयारियों के कारण वो गांव अंतिम दर्शन को नहीं जा सकी थीं। लेकिन आज उन्होंने South Africa के खिलाफ hatrick goal हैट्रिक गोल लगा कर अपने दिवंगत पिता को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर दी हैं। अब उनके प्रदर्शन के बाद उनके गाँव में जश्न का माहौल है।ए सभी लोग उनके घर जाकर शुभकामनाएं दे रहे हैं साथ ही स्थानीय खेल अधिकारी भी बधाई देने पहुंचे हैं। वंदना का सपना है कि वो अपने पिता के लिए ओलंपिक में मेडल जीतें, जिसके करीब भारत और Vandana दोनों पहुँच चुके है।बस अब एक कदम और बाकी हैं।

पिता के निधन के समय उत्पन्न असमंजस में  उनकी माँ और भाई पंकज ने उनको हौसला दिया और उनकी मां सोरणी देवी ने कहा कि बेटी पहले वो अपने उद्देश्य को पूरा करे, जिसके लिए वो गई हैं और बताया कि पिता का आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा। वंदना कटारिया के पिता की इच्छा थी कि भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक में Gold medal in hockey स्वर्ण पदक जीते।

उधार लेकर सीखा खेल

बहुत साधारण परिवार से होने और आर्थिक मजबूरी के चलते एक समय ऐसा था कि वंदना अच्छी हाँकी स्टिक और किट तक नहीं खरीद पा रही थीं। वंदना के साथ कई बार ऐसे मौके भी आए जब हॉस्टल में बाकी के खिलाड़ी तो घर चले जाते थे, लेकिन वो पैसे के अभाव में घर नहीं जा पाती थीं। कोच पूनम लता राज और विष्णुप्रकाश शर्मा ने उनकी काफी मदद की थी। वो पहले खो-खो खेलना चाहती थीं, लेकिन उनकी रनिंग स्पीड अच्छी होने के कारण कोच ने उन्हें हॉकी के लिए चुना। बता दे कि वंदना अपने 7 भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं।

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