45 प्लस के लिये कोरोना वैक्सीन नहीं, टीकाकरण थमा

उत्तराखंड45 प्लस के लिये कोरोना वैक्सीन नहीं, टीकाकरण थमा

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45 प्लस के लिये कोरोना वैक्सीन नहीं, टीकाकरण थमा

  • केंद्र से 1.37 लाख वैक्सीन की डोज मिलने का हो रहा है इंतजार
  • वैक्सीन की कमी से 18-44 आयु वर्ग का टीकाकरण भी प्रभावित

देहरादून। उत्तराखंड में 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली व दूसरी डोज लगाने के अभियान पर रोक लगानी पड़ी है। कारण यह कि प्रदेश में 45 साल से अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए कोविड वैक्सीन की डोज उपलब्ध नहीं है। केंद्र से 1.37 लाख वैक्सीन की डोज 45 प्लस आयु वर्ग के लिये मिलनी है जिनके आने के बाद ही इस आयु वर्ग को टीका लगाया जा सकेगा।

उत्तराखंड में कोरोना वैक्सीनेशन अभियान जोर-शोर से शुरू किया गया था। 45 प्लस आयु वर्ग के टीकाकरण से शुरू हुआ अभियान 18 से 44 आयु वर्ग के लिए भी शुरू कर दिया गया। अब हालात यह हैं कि प्रदेश में 45 साल से अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए कोविड वैक्सीन की डोज खत्म हो गयी है। केंद्र ने 45 प्लस आयु वर्ग के लिए 1.37 लाख वैक्सीन डोज भेजने की अनुमति दी है मगर यह वैक्सीन कब तक आएगी और टीकाकरण कब से शुरू हो पायेगा इस बात की जानकारी कोई नहीं दे पा रहा है। टीकाकरण केंद्रों के चक्कर काट रहे 45 प्लस आयु वर्ग के लोग भी सही जवाब न मिल पाने के कारण परेशान हैं। वहीं 18 से 44 आयु वर्ग के लिए वैक्सीन की पर्याप्त डोज न होने के कारण टीकाकरण कार्य प्रभावित हो रहा है।

निजी अस्पतालों में लगेगी वैक्सीन, चुकानी होगी कीमत
कोरोना वैक्सीनेशन की सरकारी चाल से परेशान लोगों को जल्द राहत मिलने जा रही है मगर लोगों को इसकी कीमत चुकानी होगी। कोविशील्ड वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट पुणे ने निजी क्षेत्र को वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) को पत्र भेजा है। सीरम इंस्टीट्यूट ने वैक्सीन की प्रति डोज की कीमत 600 रुपये निर्धारित की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) उत्तराखंड के प्रदेश सचिव डाॅ.अजय खन्ना के अनुसार आईएमए आगामी एक जून से प्रदेश के निजी अस्पतालों व मेडिकल कालेजों में कोविड टीकाकरण शुरू करने का प्रयास कर रहा है। आईएमए की ओर से प्रति वैक्सीन 600 रुपये के अलावा अस्पतालों का चार्जिंग शुल्क भी पहले ही तय कर लिया जायेगा ताकि वैक्सीन लगवाने वालो को उसकी सही कीमत पहले ही पता चल जाये। निजी अस्पतालों में टीकाकरण शुरू किये जाने के बाद ऐसे लोग जो कीमत चुकाने में समर्थ हैं वह प्राइवेट हाॅस्पिटल की ओर रूख करेंगे। इससे सरकारी टीकाकरण केंद्रो पर दबाव भी कम होगा।

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