देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 (Uttarakhand assembly election 2022) के परिणाम आने के बाद नवनिर्वाचित विधायकों पर आपराधिक मुकदमें और उनकी सुरक्षा एक चुनौती बन गई है। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में चुनाव जीतकर आए करीब 19 विधायकों पर आपराधिक मुकदमें हैं। यह कुछ विधायकों के प्रतिशत का 27 प्रतिशत बैठता है। इनमें भाजपा के आठ विधायकों पर गंभीर मामलों में मुकदमें दर्ज हैं। इनमें से पांच पर गंभीर धाराएं लगी हुई हैं। बात कांग्रेस के विधायकों की करें तो इसके 19 में आठ पर और बसपा के एक विधायक पर मुकदमा दर्ज है। जबकि दोनों निर्दलीय विधायकों पर भी आपराधिक मुकदमे दर्ज है। सबसे अधिक मुकदमें विधायक उमेश कुमार पर दर्ज हैं। इन माननीय पर 14 केस हैं।
सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत इन विधायकों को सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन आपराधिक विधायकों को सुरक्षा देना सरकार के लिए काफी चुनौती पूर्ण है। केजरीवाल ने पंजाब में सरकार बनने के बाद जिन विधायकों पर अपराधिक मुकदमें हैं उनको सुरक्षा नहीं प्रदान की है। ऐसे में उत्तराखंड में अगर भाजपा सरकार ऐसा करती है तो आम आदमी पार्टी को प्रदेश में अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।
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राज्य में सुरक्षा प्रोटोकॉल के नियम से सीएम को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा में रखा जाता हे। जिसमें विशेष कमांडो होते हैं। मंत्रियों को वाई स्पेशल श्रेणी में रखा जाता है। इनके साथ एस्कार्ट वाहन भी होता है। जिसमें चार पुलिस कर्मी तैनात रहते हैं। मंत्रियों के घर पर गारद के रूप में पांच पुलिसकर्मी ड्यूटी पर रहते हैं।

