देहरादून। राज्य के सत्ता पक्ष और विपक्षी दल खासकर भाजपा—कांग्रेस (BJP-Congress) भी अपनी—अपनी सरकार बनाने की संभावना के बीच अपने होमवर्क में जुट गए हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों ही प्रमुख दल के वरिष्ठ पदाधिकारी और नेता अपने पार्टियों के उन प्रत्याशियों से संपर्क साधने में जुटे हैं। जिन्होंने चुनाव के दौरान जोरदार चुनौती दी थी। उत्तराखंड के सियासी गलियारे में कुछ प्रत्याशियों की जीत की संभावनाओं पर सौ प्रतिशत मोहर लगा दी है और उनको लेकर चर्चाओं का बाजार भी खूब गर्म है। हालांकि चुनाव परिणाम को लेकर दोनों दल पूरी तरह से अशस्वत दिखाई दे रहे हैं। दोनों को ही पूरी उम्मीद है कि उनकी सरकार ही पूर्ण बहुमत से बनेगी। इसलिए अब दोनों ही दल अपनी सरकार बनने की संभावनाओं को लेकर अपनी रणनीति बना रहे हैं।
Read also: यूपी में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखेगी भाजपा: अनुराग ठाकुर
वहीं दूसरी ओर पहाड़ की राजनीति पर बारीकी से नजर रखने वाले राजनीति पंडितों का कहना है कि दोनों ही दल भले ही अपनी सरकार बनाने का दावा करेंं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। जबकि सत्ता दल भाजपा और कांग्रेस दोनों ही विधानसभा चुनाव में जीत के लिए 40 से अधिक सीटों का दावा कर रही है। लेकिन मतदाताओं की खामोशी को देख अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। इस चुनाव में पहाड़ के राजनीति पंडित सत्ता दल भाजपा और कांग्रेस के बीच बराबर की टक्कर मानकर चल रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो निर्दलीय या अन्य दलों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी। वहीं इस बार कुछ निर्दलीय प्रत्याशी भी मजबूती के साथ चुनाव लड़े हैं। माना जा रहा है कि उनको चुनाव परिणाम के बारे में पहले से ही कुछ अंदाजा था। इसलिए ही वे पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे थे। राज्य की पूरी तस्वीर तो आगामी 10 मार्च को साफ होगी जब राज्य की पांचवीं विधानसभा (State’s fifth assembly) के लिए हुए चुनाव की मतगणना होकर परिणाम सामने आएंगे।

