देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भले ही एक बार फिर से पुष्कर सिंह धामी को चुन लिया गया हो। पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाने में पहाड के भाजपा कददावर नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। लेकिन पहाड में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में जो एक और दिग्गज भाजपा नेता थे उनका ना सतपाल महाराज (Satpal Maharaj) है। पार्टी में सतपाल महाराज की लॉबिंग भी कुछ कम नहीं थी। सूत्रों की माने तो अंत समय में पहाड़ के सभी दिग्गजों ने मुख्यमंत्री पद की दौड़ से अपने को अलग कर लिया।
Read also: सीएम तीरथ के बाद सतपाल महाराज और धन सिंह रावत भी दिल्ली तलब
इसमें रमेश पोखरयाल निशंक भी शामिल हैं। लेकिन जो अंत तक मुख्यमंत्री पद की दौड़ में बने रहे और धामी के मुख्यमंत्री होने की राह रोकते रहे वो थे सतपाल महाराज (Satpal Maharaj)। नेतृत्व धामी केा युवा चेहरा होने और पिछले 6 महीने के कार्यकाल केा देखते हुए उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाना चाहता था। लेकिन मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल दिग्गज सतपाल महाराज की लाबिंग भी कम नहीं थी। सतपाल महाराज कैबिनेट मंत्री रहे हैं। लेकिन उत्तराखंड में उनको मुख्यमंत्री बनने से अगर किसी ने रोका तो वह है कांग्रेस। सतपाल महाराज पुराने कांग्रेसी रहे हैं।
उनकी पृष्ठभूमि कांग्रेसी रही है। वे भाजपा में शामिल होकर अपने को संघी बता रहे थे। सतपाल महाराज (Satpal Maharaj) इसी कारण से इस रेस से अंत समय में बाहर कर दिए गए। इसके अलावा इस पद की दौड़ में लगातार चौथी बार चुनाव जीते प्रेमचंद अग्रवाल भी शामिल थे। प्रेमचंद विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी ने मुख्यमंत्री के लिए उन्हें सही नहीं समझा।

