देहरादून। पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) की एक बार फिर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के पद पर ताजपोशी हो गई। लेकिन इस ताजपोशी तक पहुंचने में काफी लोगों का योगदान रहा। एक ओर जहां प्रदेश प्रभारी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह धामी की पैरवी कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर पुष्कर सिंह धामी के गुरु और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने दिल्ली में डेरा डाल दिया था। भगत सिंह कोश्यारी को आफर मिला तो उन्होंने सीधे तौर पर पुष्कर को ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने के अलावा और कोई बात नहीं की। हालांकि पुष्कर सिंह धामी की राह रोकने को पार्टी के अंदर तगड़ी लॉबी सक्रिय थी। लेकिन धामी के राजनीतिक गुरु भगत सिंह कोश्यारी के आगे सभी की चालें फेल हो गई।
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कोश्यारी ने दिल्ली में इसी कारण से डेरा डाला था कि पुष्कर को रास्ते से हटाने के लिए प्रतिकूल माहौल बनाने वालों की कमी नहीं है। उन्होंने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान माहौल को धामी के अनुकूल बनाने का काम किया। कोश्यारी चाहते थे जो भी उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बने वो पूरे पांच साल तक सरकार चलाए। बीच में मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई उठापटक न हो। 2017 में जब उत्तराखंड में भाजपा सरकार (BJP Government) बनी तो उसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव पहले तक मुख्यमंत्री पद को लेकर खूब उठापटक हुई। जिसमें दो मुख्यमंत्री भाजपा ने बदले। यहीं कारण है कि पार्टी हाईकमान इस बार पांच साल के कार्यकाल में किसी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहते थे। जिससे कि बीच में मुख्यमंत्री बदलने जैसा जोखिम उठाया जाए। इसी कारण से मुख्यमंत्री पद के नाम की घोषणा में इतना समय लगा।

