उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में उलझा दलों का सियासी गणित,वर्चस्व की लड़ाई में फंसी सीटें

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में उलझा दलों का सियासी गणित,वर्चस्व की लड़ाई में फंसी सीटें

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव – टिकट बंटवारे में दलों का सियासी गणित पूरी तरह से उलझ गया है। उत्तराखंड में कई सीटें ऐसी हैं जो कि भाजपा और कांग्रेस के लिए वर्चस्व की लड़ाई के बीच फंस गई हैं। हालांकि सबसे अधिक कलह कांगेस के भीतर मची हुई है। कांग्रेस ने 53 टिकट पहली सूची में घोषित कर दिए हैं। लेकिन अभी भी एक दर्जन से अधिक सीटों पर पेंच फंसा हुआ है। ये वो सीटें हैं जो कि वर्चस्व की लड़ाई में फंस गई हैं। कांग्रेस यह चाह रही है कि पहले भाजपा अपने पत्ते खोले लेकिन भाजपा भी यही चाह रही है कि पहले कांग्रेस टिकटों के नाम की घोषणा करे। प्रतिष्ठा की ये सीटें देहरादून कैंट, नरेंद्रनगर, ज्वालापुर, रुड़की, लक्सर, लैंसडौन, हरिद्वार ग्रामीण, डोईवाला, टिहरी, झबरेड़ा, लालाकुआं, कालाढूंगी, चौबट्टाखाल के अलावा रामनगर विधानसभा शामिल हैं। इन सभी में पार्टियों का सियासी गणित उलझा हुआ है। जिसे सुलझाने की कोशिश में दोनों दल जुटे हैं।

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नरेंद्र नगर की सीट पर ओम गोपाल रावत पर दांव खेलने की तैयारी में हैं। बता दे कि ओम गोपाल पिछली बार इस सीट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे। ओम गोपाल की कई दौर की बातचीज पूर्व सीएम हरीश रावत से हो चुकी है। माना जा रहा है कि वे जल्द ही कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करेंगे और पार्टी उनको नरेंद्र नगर की सीट से उम्मीदवार घोषित करेगी।

बात टिहरी विधानसभा की करें तो इस सीट पर किशोर उपाध्याय की दावेदारी प्रबल मानी जा रही है। किशोर उपाध्याय पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं। टिहरी विधानसभा सीट पर 2017 में भाजपा के धन सिंह नेगी विजयी हुए थे। भाजपा इस बार भी धनसिंह नेगी को चुनाव मैदान में उतार सकती है।

बता दें कि इस बार देहरादून कैंट सीट भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है। इस सीट पर टिकट को लेकर कांग्रेस में भी धमासान मचा हुआ है। यहां से सूर्यकांत,लालचंद, नवीन के अलावा कई अन्य नाम भी चर्चा में हैं। भाजपा इस सीट पर पहले ही महिला उम्मीदवार के रूप में सविता कपूर को टिकट दे चुकी है। माना जा रहा है कि कांग्रेस भी किसी ऐसी महिला प्रत्याशी को उतारने की तैयारी में हैं जो जीतने की स्थिति में हो। कांग्रेस का मानना है कि ऐसा करने से पुरूष दावेदारों के बीच चल रही उठापटक भी शांत हो जाएगी। प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी सीटों पर कांग्रस और भाजपा दोनों ही दल एक दूसरे के पत्ते खुलने का इंतजार कर रहे हैं।

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बताया जा रहा है कि दोनों दलों के पास इस समय दो से तीन नाम तक फाइनल हो चुके हैं। दूसरा दल जब प्रत्याशी की घोषणा करेगा उस दौरान तीनों में से एक नाम की घोषणा कर दी जाएगी। इसको लेकर संभावित दावेदारों में भी खलबली मची हुई है। उपरोक्त संभावित सीटों पर पार्टी किस पर दांव खेलती है, यह दूसरी पार्टी के घोषित हुए प्रत्याशी से उत्पन्न हुई स्थिति पर निर्भर करता है।

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