देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव – उत्तराखंड में कांग्रेस प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी होते ही बगावत के सुर मुखर होने लगे हैं। दूसरी सूची में नैनीताल कुमाऊं की सीटों पर भी प्रत्याशियों के नाम की घोषणा हुई थी। इन दोनों जिलों की तीन सीटों पर टिकट की घोषणा के बाद कई नेताओं ने बगावत शुरू कर दी है। रामनगर, कालाढूंगी और लालकुंआ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसियों के बीच असंतोष चरम पर है। बता दे कि रामनगर सीट से हरीश रावत के चुनाव लड़ने की घोषणा से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ने बगावत कर दी है।
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वे हरीश रावत के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि पार्टी में उनको मनाने के प्रयास तेज हो गए हैं। लेकिन वे किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं हैं। बता दे कि रामनगर सीट पर रणजीत सिंह रावत ने पुख्ता दावेदारी ठोकी थी। रणजीत के समर्थकों को पूरी उम्मीद थी कि उनको टिकट मिलेगा। लेकिन जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को कांग्रेस ने मैदान में उतारा तो रणजीत सिंह रावत और उनके समर्थकों ने बगावत कर दी। रणजीत के बेटे ब्लाक प्रमुख विक्रम रावत ने तो सल्ट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान भी कर दिया है।
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वहीं दूसरी ओर लालकुआं सीट पर भी कांग्रेस ने दावेदारों की अनदेखी करते हुए यहां से पूर्व ब्लॉक प्रमुख संध्या डालाकोटी को टिकट दिया है। इससे लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी नेता हरीश चंद्र, हरेंद्र बोरा ने बगावत का बिगुल बजा दिया है। वहीं पार्टी ने बगावत को नजरअंदाज करते हुए कालाढूंगी विधानसभा से पूर्व मंत्री महेंद्र पाल को प्रत्याशी बनाया है। इससे प्रदेश महासचिव महेश शर्मा नाराज हो गए हैं। महेश शर्मा को पूरी उम्मीद थी कि इस बार उनको टिकट दिया जाएगा। लेकिन टिकट बंटवारे के दौरान उनको नजरअंदाज किया गया है। पार्टी के असंतुष्ट नेता अब महापंचायत बुलाकर आगे की रणनीति बना रहे हैं। माना जा रहा हैं कि जिन कददावर नेताओं को टिकट बंटवारे के दौरान नजरअंदाज किया गया है वे निर्दलीय रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। जिससे पार्टी के उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

