लखनऊ। कमरतोड़ महंगाई के बीच अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के सामने सीमेंट कंपनियों ने और मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। प्रति बोरी 50 रुपये तक की बढ़ोत्तरी कर दी है।
उत्तर प्रदेश सीमेंट व्यापार संघ ने दरों को बढ़ाये जाने का विरोध किया है। संघ का कहना है कि सीसीआई की ओर से कंपनियों की इस मनमानी पर रोक लगाने के लिए पेनाल्टी तक लगा चुकी है। लेकिन, कंपनियों को उपभोक्ताओं के हितों का कोई ख्याल नहीं है। लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है।
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उत्तर प्रदेश सीमेंट व्यापार संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्याममूर्ति गुप्ता ने बताया कि महंगाई की वजह से घरेलू उपभोक्ता भी भवन निर्माण से दूर थे। वहीं सरकारी कामों की भी अभी शुरूआत नहीं हुई है।
संतोषजनक बिक्री नहीं होने के कारण सभी सामग्रियां मंदी की ओर थीं, जिससे जो उपभोक्ता कुछ काम कर रहे थे, उन्हें राहत मिल रही थी। लेकिन, कंपनियों ने लाभ वसूली के लिए मिलकर एक साथ 50 रुपये तक की बढ़ोत्तरी का ऐलान कर दिया है। वहीं जिन सीमेंट कंपनियों की उठान कम है, उन्होंने भी 35 रुपये तक की बढ़ोत्तरी की है।
श्याममूर्ति वर्मा ने बताया कि इसी रेट के लिए पूलिंग यानी कॉर्टेल पर कई कंपनियों पर सीसीआई ने करोड़ों रूपये की पेनाल्टी भी लगाई थी। लेकिन, कंपनियां अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहीं हैं। उन्होंने सभी डीलर्स से अनुरोध किया है कि माल बेचकर पहले यह बढ़त पाने का प्रयास करें और माल जरुरत का ही खरीदें, क्योंकि यह निश्चित है कि रेट बिक्री निकलने के साथ ही टूट जायेंगे।
माल बिक्री कम होने से यह पूलिंग की जा रही है कि जब जरुरत का माल ही बिक रहा है तो मनमाने रवैए से रेट लागू किए जा रहे हैं, जिसके टूटने से डीलर्स नुकसान में रहेंगे।
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उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां बिल्डर और सरकारी कामों में पचास रुपए से सौ रुपए प्रति बोरी (मनमाने) कम करके नानट्रेड बोलकर सीधे कम्पनियां आर्डर ले रही हैं और वहीं पर डीलर को महंगी बिलिंग करके मध्यम वर्ग के उपभोक्ता को चोट पहुंचा रही हैं।
एक ही माल की बड़े फर्क से बिलिंग करना अन्याय है और बिलिंग कम करके कम्पनियां जीएसटी राजस्व (सीमेंट में अठ्ठाइस प्रतिशत) का भी बड़ा नुकसान कर रही हैं।

