मेरठ। प्रदेश में नागपंचमी का पर्व आज मनाया जा रहा है। ज्योतिषियों की मानें तो नागपंचमी को सांपों की पूजा का महत्व है। अगर किसी की कुंडली में कालसर्प दोष है तो उसके लिए नागपंचमी में सांप पूजा का महत्व और अधिक है। लेकिन आम तौर पर नागपंचमी के दिन सांप की पूजा कम और यह कमाई का जरिया ज्यादा हो गया है। नाग पंचमी ही नहीं बल्कि सावन के महीने में सांपों पर आफत रहती है। पूजा के नाम पर सांपों को कई दिनों तक भूखा छोड़ा जाता है। नागपंचमी के दिन जगह—जगह सांप को पिटारे में लेकर घूमते सपेरा प्रजाति के लोग आज दिखाई दे रहे हैं। वन विभाग जीव जंतुओं को संरक्षण के बड़े दावे तो करता है। लेकिन आज नाग पंचमी के दिन वन विभाग के इन दावों की पोल सांपों को लेकर घूम रहे ये लोग खोल रहे हैं। डीएफओ मेरठ राजेश कुमार ने बताया कि सांपों के संरक्षण के लिए कई टीमों का गठन किया है जो हस्तिनापुर वन्य जीव सेंन्युअरी में तैनात हैं।
इस बारे में ज्योतिष विज्ञान भी दो मतों में बंटा हुआ है। एक ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धर्म में कालसर्प दोष में जीवित सांप की पूजा करने से असर खत्म हो जाता है। सावन के दिन में किसी एक दिन जीवित सांप की पूजा से शिव प्रसन्न होते हैं। एक अन्य दूसरे ज्योतिषाचार्य ने बताया कि जीवित सांप की पूजा का कोई विधान नहीं है। उन्होंने बताया कि जीवित सांप को दूध पिलाना शुभ होता है। सपेरों की बस्तियों में जीवित सांप की पूजा के दौरान उसको भूखा रखते हैं। जब तक पूजा समाप्त नहीं होती कुछ खाने को नहीं दिया जाता। पूजा समाप्ति के बाद सांप को जंगल में छोड़ते समय कुछ खाने को दिया जाता है।

