UP News : विदेशी कोयले के जरिये उपभोक्ताओं की जेब ढीली करने की तैयारी, अड़ा उपभोक्ता परिषद

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लखनऊ। विदेशी कोयले पर मची रार के बीच उपभोक्ता परिषद ने नया खुलासा किया है। उपभोक्ता परिषद् की याचिका पर उत्पादन निगम ने विद्युत नियामक आयोग को भेजे जवाब में कहा है कि 10 फीसदी विदेशी कोयला की खरीद होती है तो 2900 करोड़ का भार जाएगा। जिसका असर यह होगा कि 70 पैसे प्रति यूनिट बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके बाद परिषद ने आयोग के चेयरमैन से मुलाकात की है और कहा है कि उत्पादन निगम का अनुमान गलत है अब विदेशी कोयला 17 हजार रूपया प्रति टन के पार हो गया है। ऐसे में दरों में 01 रूपये प्रति यूनिट तक की हो बढ़ोत्तरी हो सकती है। साथ ही अगर खरीद हुई तो यह 5000 करोड़ रूपये का खर्च होगा। इसलिए विदेशी कोयला खरीद पर तुरंत रोक लगाये जाने की जरूरत है। जबकि, ऊर्जा विभाग ने सरकार की ओर से उत्पादन निगम को भारत सरकार और नियामक आयोग के आदेश के अनुसार पूरा निर्णय लेने का अधिकार दे दिया है। ऐसे में पेंच फंस गया है और दरों में बढ़ोत्तरी को लेकर टकराव की स्थिति आ गई है। 

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने ने कहा कि यूपी में विदेशी कोयला खरीद का मुद्दा हाई प्रोफाइल हो चुका है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की याचिका पर विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम से कई कानूनी सवाल जवाब किये थे। जिस पर उत्पादन निगम ने विद्युत नियामक आयोग में जवाब दाखिल कर दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक पी गुरु प्रसाद की तरफ से विद्युत नियामक आयोग में जो जवाब दाखिल किया है, उसमें यह मुद्दा उठाया गया है कि उत्पादन निगम की तापीय परियोजनाओं को प्रतिदिन 87900 मीट्रिक टन कोयले की जरूरत है।

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जबकि, वर्तमान में औसतन 61309 मीट्रिक टन कोयले की आपूर्ति की जा रही है। यानी कि लगभग 30 प्रतिशत कोयले की कम सप्लाई दी जा रही है। इसी को देखते हुए 10 फीसदी विदेशी कोयला खरीदने का जो लक्ष्य उत्पादन निगम की ओर से बताया गया है वह 18.95 लाख मीट्रिक टन जोड़ा किया गया है। जिसकी लागत एनटीपीसी विन्ध्याचल रिहन्द के विदेशी कोयले के टेंडर न्यूनतम 15341.41 रूपये प्रति मीट्रिक टन के आधार पर उत्पादन निगम द्वारा विदेशी कोल आयात करने पर 2900 करोड़ रूपये देय भार का अनुमान है। जिससे उत्पादन लागत में औसतन 70 पैसा प्रति यूनिट वृद्धि संभावित है।

उन्होंने कहा कि आयोग के सभी तकनीकी सवालों पर उत्पादन निगम ने गोलमोल जबाब दिया है। जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की गाइडलाइन के तहत ही जवाब होना चाहिए। उपभोक्ता परिषद ने आयोग को सौंपे प्रस्ताव में कहा है कि यदि विदेशी कोयला खरीद की मंजूरी मिली तो वर्तमान में उसकी दर 17000 रूपये प्रति टन से ज्यादा सामने आयेगी। क्योंकि यह एनटीपीसी का टेंडर जनवरी का है। वर्तमान दर के अनुसार 90 पैसे प्रति यूनिट से लेकर 01 रूपये प्रति यूनिट तक उत्पादन लागत में वृद्धि होगी। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना होगा। इसलिये विदेशी कोल की खरीद पर प्रतिबन्ध लगाया जाये। उन्होंने कहा कि नियामक आयोग इस पूरे प्रकरण को राज्य सलाहकार की बैठक में भी एजेन्डा बनाये, जिससे कि ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी संवैधानिक समिति में भी जनहित में चर्चा हो सके।    

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अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जहां उत्पादन निगम की ओर जवाब दाखिल करने की भनक लगते ही, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने एक बार फिर विद्युत नियामक आयोग चेयरमैन आर पी सिंह से मुलाकात कर एक प्रस्ताव सौंपा है। जिसमें अनेकों तकनीकी और विधिक सवाल उठाते हुए कहा है कि भारत सरकार लगातार उत्तर प्रदेश पर दबाव डालकर विदेशी कोयला क्यों खरीदवाने पर लगी है। जबकि स्वयं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह और सचिव बार-बार बयान दे रहे हैं कि कोयले की कोई कमी नहीं है।

ऐसे में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में बढ़ोत्तरी करने की साजिश क्यों की जा रही है। उपभोक्ता परिषद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग से ऊर्जा की सबसे बड़ी संवैधानिक समिति राज्य सलाहकार समिति की बैठक बुलाने की मांग उठाई है और कहा है कि यह गंभीर मुद्दा उसमें भी चर्चा किया जाना उचित होगा ।अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि भारत सरकार ऊर्जा मंत्रालय के दबाव में विदेशी कोयले का टेंडर निकालने की बात हो रही है। जबकि, आज यदि टेंडर निकाला गया तो 7 माह से पहले महंगा विदेशी कोल उपलब्ध नहीं होगा।

ऐसे में उचित यही रहेगा कि यूपी को जो 30 प्रतिशत कोयला रोज कम मिल रहा है, उसे कोल इण्डिया से उपलब्ध कराया जाये। सबसे बड़ा चौंकाने वाला मामला यह है कि उत्पादन निगम एक तरफ यूपी सरकार से अनुमति लेने के लिए पत्र लिखे जाने की बात कह रहा है, दूसरी तरफ विद्युत नियामक आयोग से टेंडर के बाद विदेशी कोयले की अतिरिक्त खर्च को पासऑन करने की बात कर रहा है, जो सीधे-सीधे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं पर बड़े भार डालने की साजिश है। ऐसे में आयोग भारत सरकार के दबाव में मंहगे कोल खरीद पर प्रतिबन्ध लगाने के लिये निर्णय करे अन्यथा भारत सरकार दबाव डालकर विदेशी कोयला खरीदवाने में सफल हो जायेगी और उसका खामिययाजा प्रदेश का उपभोक्ता भुगतेगा।

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