चीनी मोबाइल कंपनी VIVO के अधिकारी और कर्मचारियों पर कसा शिकंजा,होगी गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेशचीनी मोबाइल कंपनी VIVO के अधिकारी और कर्मचारियों पर कसा शिकंजा,होगी गिरफ्तारी

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मेरठ चीनी मोबाइल कंपनी वीवो के फर्जीवाडे पर एफआर लगाने वाले विवेचक की जांच के लिए एडीजी के निर्देश पर टीम गठित कर दी गई है। बता दें कि चीनी मोबाइल कंपनी वीवो के एक ही आईएमइआई नंबर पर करीब 13 हजार मोबाइल फोन चल रहे थे। इस मामले में कंपनी ने एक ही आईएमईआई नम्बर चल रहे हज़ारों फोनों को बाजार में झोंक दिया। इसका खुलासा होने के बाद कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी भी फंस गए। अब इस पूरे मामले में मेरठ पुलिस ने मुकदमे में चार्जशीट तैयार कर ली है।

बता दें कि वर्ष 2020 में मेरठ एडीजी कार्यालय में तैनात दारोगा आशाराम ने मेडिकल थाने में वीवो कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उस दौरान तत्कालीन एसएसपी अजय साहनी ने मुकदमे की विवेचना इंस्पेक्टर नौचंदी आशुतोष कुमार को सौंपी थी। वीवो कंपनी के खिलाफ सभी सबूत होने के बावजूद भी इंस्पेक्टर नौचंदी आशुतोष ने चार महीने बाद ही मामले में एफआर लगाकर उसको कोर्ट में दाखिल कर दिया था। एक एफआर लगाने में कई साल लगाने वाली यूपी पुलिस के एक इंस्पेक्टर ने इतनी बड़ी चाइनीज कंपनी के खिलाफ मात्र चंद महीनों में एफआर लगा दी। इससे पुलिस अधिकारियों को भी अचंभा हुआ।

जांच करने पर पता चला कि केस डायरी में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर लिखा गया है। अब एडीजी के आदेश पर आइजी रेंज प्रवीण कुमार ने इस मुकदमे की फिर से जांच के आदेश क्राइम ब्रांच को दिए। इस जांच में विवेचना में फोरेंसिंक साक्ष्य जुटाए। इसके बाद अभियोजन पक्ष से भी राय ली। जिसमें माना कि वीवो कंपनी के खिलाफ अपराध बनता है। मेरठ एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने बताया कि साक्ष्यों के आधार पर अब वीवो कंपनी के खिलाफ चार्जशीट तैयार की है। चार्जशीट कोर्ट में जमा करने के बाद कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

वहीं मुकदमे में साक्ष्यों के बिना ही एफआर लगाने वाले इंस्पेक्टर आशुतोष पर भी अब कार्रवाई होगी। वर्तमान में आशुतोष मुजफ्फरनगर जिले में थाना भोपा के प्रभारी है। उनको नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा कि आखिर उन्होंने बिना साक्ष्य जुटाए कैसे आरोपियों को क्लीनचिट दी थी।
एडीजी कार्यालय में तैनात दारोगा आशाराम ने वीवो कंपनी मोबाइल की स्क्रीन टूटने पर 24 सितंबर 2019 को मेरठ में वीवो कंपनी के सर्विस सेंटर में मोबाइल दिया था। इसके बाद कंपनी ने बैट्री, स्क्रीन और एफएम बदलकर मोबाइल दे दिया था। कुछ दिन बाद फोन की स्क्रीन फिर से खराब हो गई। दारोगा आशाराम को अंदेशा हुआ कि आईएमईआई नंबर के साथ छेड़छाड़ की है। दारोगा की शिकायत के बाद एडीजी ने साइबर सेल से जांच कराई। इसके तहत टेलीकाम जियो कंपनी से डाटा मांगा तो रिपोर्ट हैरतअंगेज खुलासा हुआ। जिसमें बताया गया कि 24 सितंबर 2019 की सुबह 11 से 11.30 के बीच देशभर में इस आइएमइआइ नंबर पर करीब 13,557 मोबाइल नंबर एक्टिव थे। इसके बाद दारोगा ने वीवो कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

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