उत्तर प्रदेश सरकार मछली पालन व्यवसाय से जुड़े मत्स्य किसानों को आजीविका के बेहतर अवसर प्रदान कर उनके आर्थिक विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी दिशा में नए कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले सौ दिनों में राज्य भर में मछली पालन के लिए दो हजार लाख से अधिक मत्सय बीज का वितरण करेगी।
कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद जी ने बताया कि प्रदेश में लघु, सूक्ष्म व्यवसाय इकाइयों को प्रोत्साहित कर रही है। इस संबंध में वह कम पूंजी में अधिक लाभ देने के लिए राज्य में मत्सय पालन को बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उ0प्र0 मत्सय पालन विकास निगम के विभागीय मत्स्य फार्मों/हैचरी एवं निजी क्षेत्र की हैचरी से मत्स्य कृषकों को गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की आपूर्ति की जायेगी। इससे मत्सय उत्पादन में वृद्धि होगी और मछली पालन को अपनाने वाले लोगों को स्थायी आजीविका भी उपलब्ध होगी।
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मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद जी रिवर रैंचिंग की तकनीक को अपनाते हुए अगले 100 दिनों में मत्स्य विभाग द्वारा विभिन्न प्रजातियों की लगभग 5 लाख मत्स्य अंगुलिका का संचय किया जाएगा। इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और राज्य में मछुआरा समुदाय की आय में वृद्धि होगी।
परीक्षण के साथ तालाबों के पानी और मिट्टी की होंगी जांच
परीक्षण के साथ तालाबों के पानी और मिट्टी की जांच होगी। अगले 100 दिनों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न तालाबों के पानी और मिट्टी के लगभग 3950 नमूनों की जांच की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक अवयवों की पूर्ति हेतु निवेश किया जायेगा, जिससे अनावश्यक निवेश पर होने वाले व्यय में कमी आयेगी।
मछली पालन के लिए 750 हेक्टेयर जल क्षेत्र को कवर किया जाएगा। प्रदेश में मत्स्य पालन के लिए नवीन 750 हेक्टेयर अतिरिक्त जल क्षेत्र का आच्छादन किया जायेगा। ग्राम सभा के आवंटित तालाबों तथा पिछले वर्ष निजी क्षेत्र में बने तालाबों में मत्स्य बीज का भण्डारण किया जायेगा। इस योजना द्वारा व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और उनकी आजीविका के साधन में वृद्धि होगी साथ ही साथ राज्य के कुल उत्पादन में वृद्धि होगी।
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प्रदेश सरकार के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद जी ने बताया कि मछुआ समुदाय के जीवन स्तर में सुधार के लिए नि:शुल्क सामूहिक दुर्घटना बीमा, मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड, आजीविका एवं रोजगार के लिए ग्राम सभा के तालाबों जलाशयों एवं नदी जल धाराओं का पट्टा, प्रशिक्षण के माध्यम से तकनीकी दक्षता में वृद्धि, नि: शुल्क मृदा जल परीक्षण, रिवर रैचिंग के माध्यम से मत्स्य संपदा का संरक्षण एवं संवर्धन करते हुए आखेट प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी। जलाशयों में नदियों में मत्स्य खेत के लिए नाव, जाल आदि की सुविधा, मत्स्य विपणन एवं मूल्यवर्धित उत्पादों का अवसर भी प्रदान किया जाएगा।

