कानपुर। ज्ञानवापी मामले की सुर्खियों के बीच अब एक मामला कानपुर जिले से सामने आया है। जहां पर पाकिस्तानी नागरिक आबिद ने नगर के थाना बेकनगंज क्षेत्र में स्थित राम जानकी मंदिर को मुख्तार नामक युवक को बेच दिया। मुख्तार ने इसको गुपचुप तरीके से तोड़कर वहां पर बिरयानी रेस्टोरेंट बना डाला। प्रकरण उस समय सामने आया जब शत्रु संपत्ति संरक्षक कार्यालय में इसके दस्तावेजों का अवलोकन किया गया। अब शत्रु संपत्ति संरक्षक ने इस पर कार्रवाई का फैसला किया है और मंदिर और दो अन्य संपत्तियों को ‘शत्रु’ संपत्ति घोषित कर उसको सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसी के साथ मंदिर खरीदकर उसमें बिरयानी रेस्टोरेंट खोलने वाले मुख्तार को नोटिस जारी कर दिया गया है।
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शत्रु संपत्ति संरक्षक कार्यालय के अनुसार कानपुर बेकनगंज क्षेत्र में मंदिर की संपत्ति को 1982 में पाकिस्तानी युवक आबिद ने गुपचुप तरीके से मुख्तार को बेच दिया। मुख्तार की मंदिर परिसर में पंक्चर की दुकान थी। आबिद 1962 में पाकिस्तान चला गया। उसका परिवार पहले से पाकिस्तान में रह रहा था। कुछ महीने बाद आबिद संपत्ति बेचने के लिए आया और मुख्तार को मंदिर की संपत्ति भी बेच डाली। मुख्तार ने संपत्ति खरीदने के बाद वहां रहने वाले हिंदू परिवारों को परिसर से बाहर कर दिया और मंदिर की जमीन पर बिरयानी रेस्टोरेंट खोल दिया।
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रेस्टोरेंट कानपुर बेकनगंज स्थित डॉक्टर बेरी चौराहे पर बना हुआ है। मकान संख्या 99/14ए सरकारी दस्तावेजों में राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट है। यहाँ कभी भगवान श्रीराम और जानकी का मंदिर था। बताया जाता है कि 80 के दशक में मंदिर में पूजा होती थी। लेकिन अब मंदिर का कुछ हिस्सा ही मौजूद है। रेस्टोरेंट चलाने वाले का दावा है कि उसने यह संपत्ति आबिद से खरीदी है। जबकि रिपोर्ट के अनुसार आबिद 1962 में पाकिस्तान चला गया था। इस पूरे मामले का पता जब से हिंदू संगठनों को चला है उसके बार से लोगों में रोष है। सभी जिला प्रशासन और पुलिस से बिरयानी रेस्टोरेंट पर बाबा का बुलडोजर चलाने की बात कह रहे हैं।

